उदयपुर। आखिर ओवर्स में धुआंधार बल्लेबाजी वाला सीन तो आपने देखा ही होगा। बॉलें बची हैं कम और रन बनाने हैं ज्यादा। ऐसे में वो बल्लेबाज भी चौके छक्के लगाने का रिस्क ले ही लेता है जिसके बारे में कहा जाता है हाथ बंधे हुए हैं या तकनीक में पोचा है। क्या कहीं नगर निगम में तो ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। 31 मार्च याने कि फाइनेंशियल इयर की एंडिंग से पहले लक्ष्य से दूर भटकते हुए निगम का दस्ता अब मिसाइल वाले अंदाज में ताबड़तोड़ कार्रवाई पर उतर आया है। एक ही बार में 20 संपत्तियां सीज की।। याने कि निगम ये कर सकता है तो फिर इतने दिन क्या हो गया था? कहीं इंतजार तो नहीं हो रहा था कि शहर के सयाने लोग खुद आएंगे टैक्स जमा कराने और उन्हें कुछ नहीं करना पड़ेगा। कहीं ऐसा तो नहीं था कि रसूखदारों का दबाव इतना ज्यादा था कि कुछ भी करो, हमारा नंबर सबसे आखिर में लो। हम तो नेताओं के राजा बेटा हैं या फिर अफसरों के चहेते। कुछ तो गड़बड़ है इस कहानी में तभी डर लगता है वो लिस्ट निकालने से जिसमें यूडी टैक्स के बकायदारों का नाम हो। ऑनलाइन करने से डरते हैं। कहीं लिस्ट ऑनलाइन आ गई और कुछ खास डिफाल्टरों के नामों से पर्दा हट गया तो भूचाल आ जाएगा—शायद यही बात डराती और सताती होगी। तभी तो अब तक कई मांगों के बावजूद सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही। लोगों को यह जानने का हक है कि कौन ऐसे हाथी हैं जो निगम की नस दबाए बैठे हैं। वैसे एक और सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी विभागों ने अपना यूडी टैक्स जमा करवा दिया है? यदि हां तो इसका श्रेय लिया जाना चाहिए और अगर नहीं, तो पहले सरकारी घर को ही ठीक करने की जरूरत है। केवल दिखावटी कार्रवाइयों से क्या हासिल होगा? तो अबकी बार कहां-कहां टैक्स के बकाया वसूलने वालों का धावा बोला गया—रविवार के अवकाश की कुर्बानी देकर यह कार्रवाई की गई। 📋 यूडी टैक्स डिफाल्टर (बकाया राशि सहित) 24 News update ₹14.24 लाख ₹12.39 लाख ₹6.45 लाख ₹3.41 लाख ₹3.01 लाख ₹3.01 लाख ₹2.97 लाख ₹2.89 लाख ₹2.47 लाख ₹2.07 लाख ₹1.76 लाख ₹1.52 लाख ₹1.49 लाख ₹1.34 लाख ₹1.26 लाख ₹1.20 लाख ₹1.16 लाख ₹94 हजार ₹85 हजार ₹85 हजार आयुक्त द्वारा जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि नगरीय विकास कर जमा नहीं कराने पर इन व्यावसायिक संपत्तियों को सीज कर गतिविधियां बंद कराई गईं। संबंधित फर्मों को पहले नोटिस भी दिए जा चुके थे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के तहत कार्रवाई की गई। 31 मार्च तक ब्याज और पेनल्टी में छूट का लाभ दिया जा रहा है, इसके बाद बकायादारों को अतिरिक्त भार के साथ टैक्स जमा करना होगा। निगम ने साफ कर दिया है कि यूडी टैक्स हर हाल में वसूला जाएगा और जरूरत पड़ी तो आगे भी संपत्तियां सीज की जाएंगी। अब सवाल फिर वहीं खड़ा है—अगर सूची है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? आखिर किसका डर है? या फिर यह सिर्फ साल के अंत की कार्रवाई भर है? नई सूचना : सुबह सीज की संपत्ति, सायं तक 4 संपत्ति का टैक्स जमा नगर निगम द्वारा रविवार को सवेरे शहर की 20 संपत्तियों को नगरीय विकास कर बकाया होने के कारण सीज किया गया था जिसमें से चार संपत्ति मालिकों द्वारा अपना नगरी विकास कर जमा करवाया गया। सीज संपत्ति में से पारस मल पंचोली, दिल्ली टेलर्स, किशनलाल मेनारिया, नेमीचंद जैन द्वारा अपना यूडी टैक्स जमा करवा दिया गया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मानवता की मिसाल”- लावारिस अस्थियों के कलश तैयार कर हरिद्वार विसर्जन का निर्णय झाड़ियों में छुपी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, 50 लाख का केमिकल जब्त