24 न्यूज अपडेट, राजसमंद। कुंभलगढ़ किले में मोहर्रम के जुलूस की अनुमति को लेकर विवाद अब और अधिक गहराता जा रहा है। आज यानी गुरुवार को भी हालात कल जैसे ही बने रहे। किले में किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा, बाजार आज भी बंद रहे और स्थानीय बसों का संचालन भी पूरी तरह ठप है। बाहर से आने वाले पर्यटक भी किला नहीं देख पा रहे हैं, जिससे पर्यटन प्रभावित हुआ है और स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी है। हिंदू संघर्ष समिति की ओर से जुलूस को लेकर विरोध जताते हुए आज भी प्रदर्शन जारी रहा। समिति का कहना है कि जब पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुसार शाम 5 बजे के बाद किले में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, तो मोहर्रम के ताजियों को शाम में किले में जाने की अनुमति कैसे दी गई? समिति ने इसे धार्मिक आयोजनों में दोहरे मापदंड बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
कल हुआ था उग्र प्रदर्शन, बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद
बुधवार को हिंदू संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग कुंभलगढ़ बस स्टैंड पर एकत्र हुए और किले की ओर मार्च किया। रास्ते में टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ गए। इस दौरान किले में प्रवेश पर रोक को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तीखी नोकझोंक भी हुई। संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन ने कुंभलगढ़ में भारी पुलिस बल तैनात किया है। कई थानों के जवानों को मौके पर लगाया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। इस बीच कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रहे हैं। कल उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस पूरे विवाद की जड़ पुरातत्व विभाग की चूक है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले केलवाड़ा में भी मोहर्रम के रूट को बदला गया था, तो यहां भी ऐसा किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में समुचित समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
संघर्ष समिति का ऐलानः बाजार अनिश्चितकालीन बंद रहेगा
हिंदू संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक मोहर्रम जुलूस की अनुमति वापस नहीं ली जाती, तब तक कुंभलगढ़ का बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा। समिति ने तय किया है कि केवल सुबह 6 से 8 बजे और शाम 6 से 8 बजे तक जरूरी वस्तुओं की खरीद-फरोख्त के लिए दुकानें खोली जाएंगी।
पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय पर असर
विवाद का असर कुंभलगढ़ में पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। गुरुवार को दूर-दूर से आए सैकड़ों पर्यटक किले के बाहर से लौटते देखे गए। होटल, दुकानें और गाइड सेवाएं सब ठप हो गई हैं। इससे ना केवल पर्यटकों को असुविधा हो रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है।
सवाल बरकरारः शाम 5 बजे बाद की अनुमति किस आधार पर?
संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों का मुख्य सवाल यही है कि जब नियमों के अनुसार शाम 5 बजे बाद किले में प्रवेश निषेध है, तो फिर मोहर्रम के लिए अपवाद क्यों किया गया? क्या यह नियमों की अनदेखी नहीं है? क्या यह धार्मिक आयोजनों में भेदभाव का उदाहरण नहीं है? स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है, और अब सबकी निगाहें प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह विवाद और गहराने की आशंका है।
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