24 News Update उदयपुर। नगर निगम के अफसर सोचते हैं शहर की जनता मूर्ख है। जैसे चाहो, आंक लो—हांक लो। कोई कुछ नहीं कहने सुनने वाला है। राजनेता तो पहले ही अपनी करतूतों के कारण अफसरों के आगे मुंह खोलने और जनता के हितों की बात करने लायक रहे ही नहीं। ऐसे में मनमानी का खुला आलम चल रहा है। यूडी टेक्स की वसूली में भी यही सब दिखाई दे रहा है। जब चाह, जिस पर चाहा कार्रवाई कर दी। डिफाल्टरों से वसूली की ना डेडलाइन, ना टाइम लाइन। बस, वाहवाही लूटने के लिए अफसर गाहे बगाड़े बड़ी मछलियों पर हाथ डाल रहे हैं। वह सूची भी सार्वजनिक करने से अफसर डर रहे हैं कि जिससे निगम प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करता है। याने, आज किस पर हुई, कल किस पर होगी और परसों किसका नंबर आएगा?? कौन पुराना डिफाल्टर है, कौन नया इसका कोई सार्वजनिक लेखा जोखा ही नहीं है। और अगर है तो उसी जनता से छिपाया जाता है जिसके टेक्स के पैसों से अफसर तनख्वाह पाते हैं।आज नगर निगम की कार्रवाइयों से यह साफ हो गया कि डिफाल्टरों पर कार्रवाई वरीयता के आधार पर हो ही नहीं रही है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि चार दिन पहले निगम के दस्ते ने 20 जगहों पर जो कार्रवाइयां कीं उसमें से तीन प्रतिष्ठान तो ऐसे थे जिनका बकाया 1 लाख से कम है। यही नहीं कुल 17 ऐसे प्रतिष्ठान थे जिनके कुल बकाया 5 लाख से कम के थे।इसके विपरीत निगम की ओर से आज जो कार्रवाई हुई है उसमें करीब 25 लाख रुपए बीएन कॉलेज के 5 लाख रुपए आरएमवी कॉलेज के लंबे समय से बकाया है। तो इस बात से यह तो साफ हो गया है कि नगर निगम के अफसर से लेकर मातहत कर्मचारी तक यूडी टेक्स की वूसली में मनमाना खेल खेल रहे हैं। जब मन चाहे, उस पर डंडा चला दिया, जो प्रभावशाली है उसका नाम या तो आ ही नहीं रहा है, या फिर बाद में आ रहा है। इसमें आशंका यह भी है कि राजनीतिक आकाओं को पूछने के बाद चुनिंदा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करने का ढोंग किया जा रहा हो।आज की कार्रवाई से ये भी साफ हो गया कि आरएमवी और बीएन का नंबर चार दिन पहले की लिस्ट में आ जाना चाहिए था। या फिर उससे पहले की कार्रवाइयों में आ जाना था। मगर क्यों नहीं आया? यह जांच का विषय हो सकता है।अब शहरवासी पूछ रहे हैं कि निगम के आयुक्त खन्ना साहब खुद दस्तावेज जारी कर बताएं कि आखिर ऐसा कैसे हो रहा है कि अधिक बकाया वालों का नंबर बाद में आ रहा है और कम बकाया वालों का पहले। अगर पुराने बकाया के आधार पर कार्रवाई हो रही है तो वो लिस्ट सार्वजनिक करें जिससे कार्रवाई की वरीयता तय की जा रही है। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो यह तय माना जाएगा कि कहीं ना कहीं राजनीतिक दबाव व भाई भतीजावाद और लालफीताशाही का साम्राज्य चलाया जा रहा है।चार दिन पहले तक निगम जिन लोगों पर सबसे पहले टूटा, वे कौन थे? वही छोटे दुकानदार, छोटे मकान मालिक—जिनका बकाया एक लाख से भी कम था। तब तर्क था “जीरो टॉलरेंस”। आज सवाल है—क्या जीरो टॉलरेंस का पैमाना भी बकायेदार की हैसियत देखकर बदलता है? उनके ज्यादा समय कैसे व किस फार्मूले से मिल जाता है जरा जनता को भी बताये!!अगर 50 हजार और 80 हजार वालों पर पहले ताला लग सकता है, तो 25 लाख और 5 लाख वालों का नंबर आखिर अब क्यों आया? क्या ये वही “डेथ ओवर्स” वाली बल्लेबाजी है, जहां आखिरी वक्त में रन रेट बचाने के लिए बड़े शॉट खेले जा रहे हैं? कार्रवाई हुई… लेकिन टाइमिंग पर सवालगुरुवार सुबह निगम की टीमों ने BN यूनिवर्सिटी और RMV महिला कॉलेज में दबिश देकर रजिस्ट्रार ऑफिस सीज कर दिए। निगम के मुताबिक दोनों संस्थानों पर कुल 30 लाख रुपए से ज्यादा का यूडी टैक्स बकाया था, जिसके लिए कई बार नोटिस दिए जा चुके थे। कार्रवाई पूरी तरह “स्मार्ट” थी—एग्जाम प्रभावित नहीं हो, इसलिए सीधे ऑफिस सीज… किए गए। लेकिन सवाल ये कि क्या इतनी “संवेदनशीलता” छोटे बकायेदारों के लिए भी दिखाई गई थी? टारगेट का दबाव या चयनित सख्ती?नगर निगम 20 करोड़ की वसूली के लक्ष्य के पीछे दौड़ रहा है और 31 मार्च करीब है। 17.60 करोड़ तक पहुंचने के बाद अब आखिरी दिनों में बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई शुरू हुई है।तो क्या पहले आसान टारगेट पूरे किए गए और अब “हेवी वेट” की बारी आई है? या फिर… क्या वाकई कुछ “नाम” ऐसे थे जिन तक पहुंचने में सिस्टम को वक्त लगा? या यूं कहें—हिम्मत जुटानी पड़ी? असली सवाल अब भी बाकीक्या निगम बकायेदारों की पूरी सूची सार्वजनिक करेगा?क्या बड़े संस्थान और रसूखदार नाम पहले से सूची में थे?और सबसे अहम—क्या अगली बार भी कार्रवाई का क्रम ऐसा ही रहेगा? क्योंकि शहर अब समझने लगा है कि “सीजिंग” सिर्फ ताले लगाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि निगम की प्रतिष्ठा का आईना भी होता जा रहा है जो धुमिल होती नजर आ रही है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जैन गरबा में सैकड़ों महिलाओं ने रचा इतिहास, गूंजे भक्ति और संस्कृति के रंग एसबीआई ने बीमा लाभ के तहत एक करोड़ रुपये की राशि का मृतक की पत्नी को चैक प्रदान किया