उदयपुर, 21 जनवरी। दक्षिणी राजस्थान को एग्री-टूरिज्म के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राजस्थान विद्यापीठ ने एक और अहम कदम बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड से आए 20 किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को विद्यापीठ के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज का व्यापक शैक्षणिक और प्रायोगिक भ्रमण किया। इस दौरान स्विस किसानों ने भारतीय कृषि पद्धतियों, अनुसंधान कार्यों और ग्रामीण आधारित नवाचारों को नजदीक से समझा और खुले दिल से सराहना की। विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने बताया कि यह भ्रमण विश्वविद्यालय की उस दूरदर्शी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत विदेशी किसानों, कृषि विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को भारतीय कृषि व्यवस्था से जोड़ते हुए कृषि पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने कृषि महाविद्यालय के विभिन्न विभागों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, एग्रोनॉमी फार्म, फलोद्यानों और एकीकृत पशुधन उत्पादन इकाइयों का विस्तार से अवलोकन किया। स्विस किसानों के लिए यह भ्रमण केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि अनुभवात्मक भी रहा। उन्होंने भारतीय कृषि, डेयरी फार्मिंग और ग्रामीण जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से देखा। विशेष रूप से स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज द्वारा विस्तार सेवाओं के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की कार्यप्रणाली ने उन्हें प्रभावित किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहा है। उन्होंने पारंपरिक खेती की ओर लौटने और आधुनिक तकनीक के साथ उसके संतुलित समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कई किसान बढ़ती लागत और कम मुनाफे के चलते पॉलीहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सब्जी उत्पादन में बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। भ्रमण की शुरुआत अधिष्ठाता प्रो. गजेन्द्र माथुर द्वारा स्विस प्रतिनिधिमंडल के आत्मीय स्वागत से हुई। उन्होंने विद्यापीठ की कृषि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार आधारित दृष्टि से किसानों को अवगत कराया। इसके बाद प्रो. इन्द्रजीत माथुर ने विश्वविद्यालय, कृषि महाविद्यालय की संरचना, शैक्षणिक कार्यक्रमों और अनुसंधान गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कृषि फार्म भ्रमण के दौरान डॉ. सौरभ राठौड़ ने स्विस किसानों को भारतीय फसल उत्पादन प्रणाली, डेयरी फार्मिंग और एकीकृत कृषि मॉडल की जानकारी दी तथा उनके तकनीकी प्रश्नों के उत्तर दिए। इस दौरान स्विस किसान विशेष रूप से कड़कनाथ जैसी देशी कुक्कुट नस्ल को लेकर उत्सुक दिखाई दिए। उन्होंने देशी पशुधन और कुक्कुट नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विद्यापीठ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। स्विस प्रतिनिधिमंडल ने माना कि राजस्थान विद्यापीठ का यह मॉडल न केवल भारतीय किसानों के लिए उपयोगी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी कृषि का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जश्न-ए-ईद-मीलाद-उन-नबी पर ड्राई डे की मांग, अंजुमन तालीमुल इस्लाम ने ज्ञापन सौंपा उदयपुर में कल से स्कूल पूर्व निर्धारित समय पर संचालित होंगे, आदेश जारी