वॉशिंगटन, 20 फरवरी। अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार के केंद्र में चल रहे बड़े विवाद में शुक्रवार को ऐतिहासिक मोड़ आ गया। Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रपति को इस स्तर पर एकतरफा आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक राष्ट्रवाद पर आधारित नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। एजेंसी एपी के अनुसार, यह मामला उनके एजेंडे का पहला बड़ा संवैधानिक परीक्षण था, जो सीधे सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाए गए थे टैरिफ अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी आयात शुल्क लगा दिए थे। उनका तर्क था कि विदेशी निर्भरता अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही है और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए टैरिफ जरूरी हैं। ट्रम्प का दावा था कि इन टैरिफ से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व मिला, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। लेकिन अदालत ने माना कि राजस्व या व्यापार घाटा अपने-आप में “आपातकाल” नहीं ठहराया जा सकता। 49 साल पुराने कानून का सहारा ट्रम्प प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ये टैरिफ लगाए थे। यह कानून राष्ट्रपति को असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में विदेशी आर्थिक लेन-देन नियंत्रित करने की शक्ति देता है। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में कहा कि IEEPA में “टैरिफ” शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और न ही यह राष्ट्रपति को कराधान जैसी व्यापक शक्ति देता है। न्यायाधीशों ने संकेत दिया कि टैरिफ मूलतः कर का स्वरूप हैं, और कर लगाने का अधिकार संविधान के तहत कांग्रेस के पास है। 12 राज्यों ने दी थी चुनौती टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों—एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट—ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमा लांघी है। निचली अदालतों—कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट—ने पहले ही इन टैरिफ को गैरकानूनी ठहरा दिया था। सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई के दौरान जजों ने बार-बार पूछा कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना वैश्विक स्तर पर व्यापक टैरिफ लागू कर सकता है। आर्थिक और राजनीतिक असर ट्रम्प सरकार ने दलील दी थी कि यदि टैरिफ हटाए गए तो अरबों डॉलर की वसूली लौटानी पड़ सकती है, जिससे अमेरिकी खजाने को झटका लगेगा। लेकिन अदालत ने साफ कर दिया कि संवैधानिक सीमाओं से परे जाकर आर्थिक नीति नहीं बनाई जा सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाएगा। साथ ही, यह अमेरिकी शासन व्यवस्था में शक्तियों के संतुलन—कार्यपालिका और विधायिका—की पुनः पुष्टि भी करता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation ब्रिटेन में किंग चार्ल्स के भाई प्रिंस एंड्रयू गिरफ्तार, एपस्टीन मामले में 17 वर्षीय लड़की से यौन शोषण का आरोप