24 News Update जयपुर। राजस्थान की सरकारी भर्तियों की पवित्रता पर अब तक का सबसे बड़ा सवालिया निशान लग गया है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं में हुए सुनियोजित और हाई-टेक फर्जीवाड़े का ऐसा पर्दाफाश किया है, जिसने चयन बोर्ड की कार्यप्रणाली, आउटसोर्सिंग सिस्टम और आंतरिक निगरानी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कोई साधारण नकल या पेपर लीक नहीं, बल्कि ओएमआर शीट्स से लेकर रिजल्ट जनरेशन तक पूरी डिजिटल चेन में की गई आपराधिक छेड़छाड़ का मामला है। 3 परीक्षाएं, 3212 पद और 9.40 लाख अभ्यर्थीएसओजी के अनुसार, वर्ष 2018 में आयोजित सुपरवाईजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा, और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा इन तीनों परीक्षाओं के लिए कुल 3212 पद थे, जिनके लिए 9,40,038 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। परीक्षाएं वर्ष 2019 में आयोजित हुईं। परिणाम तैयार करने की सबसे संवेदनशील प्रक्रिया—ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग—को गोपनीय मानते हुए आउटसोर्स फर्म ‘राभव लिमिटेड’, नई दिल्ली को सौंपा गया। स्कैनिंग के बाद ‘डिजिटल खेल’एसओजी की जांच में सामने आया कि ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के बाद ही असली खेल शुरू हुआ। स्कैन की गई ओएमआर शीट्स के डिजिटल डाटा में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई। चुनिंदा अभ्यर्थियों के अंकों को कूटरचित तरीकों से बढ़ाया गया। अयोग्य अभ्यर्थियों को मेरिट में ऊपर पहुंचाकर चयनित करा दिया गया।जब राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने मूल ओएमआर शीट्स की पुनः स्कैनिंग कराई, तो परिणामों में भयानक विसंगतियां सामने आईं—यहीं से पूरे षड्यंत्र की परतें खुलनी शुरू हुईं। तकनीकी प्रमुख ही निकला ‘मुख्य सूत्रधार’इस प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिस अधिकारी पर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता की जिम्मेदारी थी, वही इस षड्यंत्र का मुख्य कर्ताधर्ता निकला। एसओजी के अनुसार, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में तत्कालीन उप निदेशक (सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर) एवं तकनीकी प्रमुख संजय माथुर—जो ओएमआर स्कैनिंग और रिजल्ट जनरेशन के प्रभारी थे— अपने पद का दुरुपयोग कर स्कैनिंग टीम और आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों से मिलीभगत करते हुए अपने परिचित अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचा रहे थे। फोटोशॉप से बदले उत्तर, अंकों में ‘जादुई उछाल’जांच में यह भी उजागर हुआ कि ओएमआर शीट्स की स्कैन कॉपी में फोटोशॉप जैसे सॉफ्टवेयर के माध्यम सेसही उत्तर बाद में भरे गए। सबसे सनसनीखेज उदाहरण: अभियुक्त पूनम माथुर को वास्तविक रूप से करीब 63 अंक मिलने थे, लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए परिणाम में उसे 182 अंक दिखा दिए गए। इसी तरह कई अभ्यर्थियों के वास्तविक 30–50 अंकों को बढ़ाकर 185 से अधिक अंक दर्शाए गए, जिससे वे सीधे चयन सूची में पहुंच गए। जांच समिति में ही बैठा दिया गया मुख्य आरोपीभ्रष्टाचार की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं होती। एसओजी जांच में सामने आया कि जब इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए चयन बोर्ड ने प्रशासनिक समिति बनाई, तो उसी समिति में मुख्य सूत्रधार संजय माथुर और सह अभियुक्त प्रवीण गंगवाल को सदस्य बना दिया गया। यानी, जांच की कुर्सी पर ही आरोपी बैठा था, ताकि साक्ष्यों को प्रभावित किया जा सके और सच बाहर न आए। 5 आरोपी गिरफ्तार, और भी बड़े नामों की आशंकाएसओजी के उप महानिरीक्षक परीस देशमुख के पर्यवेक्षण में, अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह द्वारा की गई गहन जांच के बाद अब तक पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है— गिरफ्तार अभियुक्तों में शादान खान,विनोद कुमार गौड़, श्रीमती पूनम माथुर संजय माथुर – तत्कालीन उप निदेशक (सिस्टम एनालिस्ट), राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, प्रवीण गंगवाल – प्रोग्रामर, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि बोर्ड के कार्मिकों ने न केवल अपने परिचितों को चयनित कराया, बल्कि आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों के जरिए अन्य अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की अवैध रकम लेकर उनके परिणामों में भी हेराफेरी कराई। किन धाराओं में केसअब तक के अनुसंधान में अभियुक्तों के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992 की धारा 3, 5, 6, तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 और 84-बी के तहत अपराध प्रमाणित पाए गए हैं। एसओजी का कहना है कि अनुसंधान अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले का दायरा और भी बढ़ सकता है।सवालों के घेरे में पूरी भर्ती प्रणालीयह मामला सिर्फ पांच गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। यह खुलासा सीधे-सीधे सरकारी भर्तियों में आउटसोर्सिंग सिस्टम, डिजिटल सुरक्षा, और आंतरिक निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लाखों मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ हुए इस खेल ने साबित कर दिया है कि अगर सिस्टम के अंदर बैठा व्यक्ति ही भ्रष्ट हो, तो सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली प्रक्रिया भी ध्वस्त हो सकती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजस्थान में हाईवे पर शराब की दुकानें बंद नहीं होंगी, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक जोधपुर पुलिस का बड़ा साइबर फ्रॉड खुलासा: 1100 करोड़ की ठगी का अंतरराष्ट्रीय गिरोह पकड़ा, कंबोडिया से जुड़े तार