Site icon 24 News Update

शिल्पग्राम उत्सव-2025: “ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ मां…” ने मंत्रमुग्ध किया दर्शकों को

oplus_0

Advertisements

उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर में आयोजित शिल्पग्राम उत्सव-2025 का रविवार का दिन लोक संस्कृति की विभिन्न झलकियों और रंग-बिरंगे प्रस्तुतियों से भरपूर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर राजस्थान की प्रसिद्ध लोकनृत्य शैली घूमर ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गोल घेरे में नृत्य करती बनी-ठणी महिलाओं की लयकारी, भाव-भंगिमाएं और तालबद्धता ने तालियों की गूंज से पूरे शिल्पग्राम को जीवंत कर दिया। यह घूमर किशनगढ़ की चित्रकला शैली से जुड़ी है और महाराजा सावंत सिंह के समय में विकसित हुई थी।

राजस्थान के ही लोकनृत्य तेराताली में नर्तकियों ने पैरों और हाथों से ताल दी, सिर पर कलश और मुंह में कटार लेकर नृत्य किया, जिसे देखकर दर्शक अभिभूत हो उठे। वहीं, पश्चिम बंगाल के राय बेंसे में एक्रोबेटिक करतब, महाराष्ट्र की लावणी, कालबेलिया डांस, पुरुलिया छाऊ डांस, और सिद्धि धमाल ने दर्शकों के रोमांच को दोगुना कर दिया।

oplus_2097152

भपंग वादन, छापेली और बिहू ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। मेवात क्षेत्र के लोक कलाकार भपंग वादन से दिलों के तार झंकृत कर गए, उत्तराखंड के छापेली नृत्य ने गुदगुदी का मज़ा दिया, असम का बिहू डांस, मणिपुर का थांग-ता स्टिक डांस, और पंजाब का भांगड़ा दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर गया। सिंघी छम, कर्ण ढोल और ब्रज के मयूर नृत्य ने भी दर्शकों को खूब रिझाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहिता दीक्षित और माधुरी शर्मा ने किया।

मुख्य कार्यक्रम से पहले मुक्ताकाशी मंच पर सुंदरी वादन, कुच्छी भजन और भवई नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। वहीं, बंजारा मंच पर ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम ने मेलार्थियों को खुलकर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। कार्यक्रम समन्वयक सौरभ भट्ट द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी ने कार्यक्रम को और रोचक बना दिया।

सभी थड़ो पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक प्रस्तुतियों का दौर जारी रहा। इसमें आदिवासी गेर व चकरी, बाजीगर, तेरहताली, बीन जोगी, भवई, कुच्छी ज्ञान, मांगणियार गायन, गलालेंग (लोक कथा), घूघरा-छतरी (मीणा ट्राइब), रिखिया ज्ञान (झारखंड), पावरी (महाराष्ट्र-गुजरात), कठपुतली, सुंदरी, पारंपरिक आदिवासी नृत्य तारपा और पीपली पर नाद शामिल थे। प्रांगण में घूमते हुए बहरूपिये और खूबसूरत स्कल्पचर्स ने मेलार्थियों का विशेष मनोरंजन किया।

oplus_0

सोमवार शाम के आकर्षण:
मुक्ताकाशी मंच पर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान द्वारा निर्देशित म्यूजिकल सिंफनी, गुजरात और राजस्थान के डांग, राजस्थान की घूमर और ब्रज मयूर डांस, मेवात क्षेत्र के भपंग वादन, सिद्धि धमाल, सिक्किम के भूटिया लोक नृत्य, लावणी, पुरुलिया छाऊ, ढेड़िया, भांगड़ा, ओडिशा का गोटीपुआ और असम का बिहू आदि लोक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे।

शिल्पग्राम उत्सव-2025 ने न केवल राजस्थान की लोक संस्कृति बल्कि पूरे भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शकों के समक्ष जीवंत रूप में प्रस्तुत किया और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Exit mobile version