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उदयपुर में सहारा निवेशकों का ज्ञापन: 13 करोड़ निवेशकों के भुगतान और 22 लाख कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की मांग

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उदयपुर। सहारा से जुड़े “सहारीयनस” प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर, उदयपुर को ज्ञापन सौंपकर 13 करोड़ निवेशकों के भुगतान, 22 लाख कार्यकर्ताओं की सुरक्षा तथा प्रबंधन को कार्य करने की अनुमति देने की मांग की है। ज्ञापन में संस्था की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन संकट और संपत्तियों के निस्तारण से जुड़े कई बिंदु विस्तार से रखे गए। मीडिया से बातचीत में पदाधिकारियों ने कहा कि सहारा निवेशकों को पोर्टल के माध्यम से केवल 50 हजार का भुगतान किया जा रहा है जो नाकाफी है। गृह मत्री अमित शाह को खुद इस दिशा में पहल करनी चाहिए। साथ ही बेरोजगार हुए लाखों लोगों के रोजगार की भी पहल करनी चाहिए।

2012 के भुगतान मॉडल का हवाला

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2012 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अंतर्गत RNBC भुगतान प्रक्रिया के दौरान सहारा इंडिया परिवार ने लगभग 73,000 करोड़ रुपये का भुगतान सफलतापूर्वक संपन्न किया था। यह भुगतान देशभर में संचालित लगभग 5,000 कार्यालयों और 22 लाख कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया गया था। प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान में भी किसी बाहरी पोर्टल के बजाय उसी शाखा-आधारित प्रत्यक्ष भुगतान मॉडल को अपनाया जाना चाहिए।

प्रबंधन में भय का माहौल

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि संस्थापक “सहाराश्री” के निधन के बाद संस्था में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया है। आरोप लगाया गया है कि जो भी व्यक्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी लेने का प्रयास करता है, उसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जिससे संस्था में भय का वातावरण बना हुआ है और भुगतान प्रक्रिया बाधित है।

कार्यकर्ताओं की स्थिति और आत्महत्याओं का दावा

प्रतिनिधियों ने दावा किया कि भुगतान में देरी और निवेशकों के दबाव के कारण अब तक लगभग 12,000 कार्यकर्ताओं द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। साथ ही कई कार्यकर्ता भूमिगत होने को मजबूर हैं तथा उनके साथ मारपीट और उत्पीड़न की घटनाएं भी हो रही हैं। ज्ञापन में प्रशासन से इन 22 लाख कार्यकर्ताओं को तत्काल पुलिस संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है।

संपत्ति और देनदारी का आंकड़ा

ज्ञापन में कहा गया है कि संस्था की कुल परिसंपत्ति लगभग 8 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि देनदारी लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें अंबी वैली सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि इन परिसंपत्तियों को निजी समूहों, जैसे अडानी समूह, को सौंपे जाने की साजिश रची जा रही है और संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) प्रस्तावों को रोका जा रहा है।

न्यायालयीय संदर्भ

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि माननीय न्यायमूर्ति संजिव खन्ना की पीठ द्वारा सितंबर 2024 में ED की कार्यवाही पर रोक के संकेत दिए गए थे। प्रतिनिधियों का कहना है कि इसके बावजूद प्रबंधन में भय का वातावरण बनाए रखना दुर्भावनापूर्ण है।

प्रशासन से मांग

प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

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