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राजपूत महासभा संस्थान का 27वां सामूहिक विवाह, 40 जोड़े बने जीवनसाथी

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24 News Update उदयपुर। राजपूत महासभा संस्थान, उदयपुर संभाग के तत्वावधान में आयोजित 27वें विशाल सामूहिक विवाह समारोह ने सामाजिक समरसता, परंपरा और सादगी का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। फतहस्कूल परिसर में आयोजित इस भव्य आयोजन में 40 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह बंधन में बंधकर जीवन की नई यात्रा पर अग्रसर हुए। एक साथ 40 पंडितों द्वारा किए गए मंत्रोच्चार से पूरा पांडाल गूंज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

भव्य बिंदौली ने खींचा शहर का ध्यान
टाउन हॉल से निकली बिंदौली में 40 घोड़े और 10 सुसज्जित बग्घियां शामिल रहीं। बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर समाजजन नाचते-गाते बिंदौली के साथ चले। यह शोभायात्रा बापू बाजार, सूरपोल और चंपालाल धर्मशाला मार्ग से होती हुई फतहस्कूल पहुंची। मार्ग में दुकानदारों, राहगीरों और नागरिकों ने रुककर वर-वधुओं पर पुष्पवर्षा की और आशीर्वाद दिया। घोड़ों पर सवार दूल्हे और सजी बग्घियों में बैठी दुल्हनों का यह दृश्य हर किसी को भावविभोर कर गया।

विधि-विधान से सम्पन्न हुईं रस्में
दोपहर एक बजे विवाह स्थल पर तोरण की रस्म परंपरागत रीति से सम्पन्न हुई। चार सुसज्जित तोरण द्वारों पर पूजा-अर्चना, फूलों की आरती और पारंपरिक विधानों के साथ सभी वर-वधुओं ने क्रमशः रस्में निभाईं। इसके पश्चात वरमाला की रस्म के दौरान जब नवयुगलों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, तो पांडाल मेवाड़ के आराध्य श्री एकलिंगनाथ और चारभुजा नाथ के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित अतिथियों और समाजजनों ने नवदंपतियों को स्नेहिल आशीर्वाद दिया।

अतिथियों ने दिया सामाजिक एकता का संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि मेघराज सिंह रॉयल ने समाज को संगठित होकर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि हमारी परंपराएं, संस्कार और सांस्कृतिक विरासत ही हमारी पहचान हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता है।
संस्थान अध्यक्ष संतसिंह भाटी ने बताया कि सभी वर-वधुओं के लिए मंच और वेदियों पर क्रमवार व्यवस्था की गई थी, जहां पंडितों के निर्देशन में विवाह की सभी रस्में सम्पन्न कराई गईं। पूरे आयोजन में अनुशासन, गरिमा और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया।

अतिथियों का पारंपरिक स्वागत, भंडारे का आयोजन
समारोह में पधारे गणमान्य अतिथियों का राजपूत परंपरा के अनुसार तलवार भेंट, उपरणा ओढ़ाकर और पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया गया। आयोजन के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें समाजजनों ने सामूहिक सहभागिता निभाई।

समाजसेवियों और विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान
संस्थान के महासचिव प्रदीप सिंह भाटी ने बताया कि समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी मेघराज सिंह रॉयल, पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, रामप्रतापसिंह डिग्गी, भाजपा नेता हिम्मतसिंह झाला, राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, पूर्व विधायक रणधीरसिंह भींडर, रतनसिंह झाला, पूर्व विधायक प्रीति गजेन्द्रसिंह शक्तावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चेतना भाटी, एएसपी सूर्यवीरसिंह, मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष अशोकसिंह मेतवाला, संस्थान जिलाध्यक्ष बालूसिंह कानावत, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़, रावणा राजपूत समाज प्रदेशाध्यक्ष वीरेन्द्र रावणा तथा ग्रामीण विधायक फलसिंह मीणा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर मेघराज सिंह रॉयल, प्रतापसिंह खाचरियावास, रामप्रतापसिंह डिग्गी, हिम्मतसिंह झाला, कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, रणधीरसिंह भींडर, वीरेन्द्र रावणा, वीरमदेवसिंह कृष्णावत एवं यदुराजसिंह कृष्णावत को क्षत्रिय शिरोमणि विभूति सम्मान से नवाजा गया।
इसके अतिरिक्त रतनसिंह झाला, महेन्द्रपालसिंह चौहान, चन्द्रसिंह भाटी, केदारसिंह राठौड़, गिरिराजसिंह भाटी, शंकरसिंह सोलंकी, करनसिंह सांखला, रामसिंह सोलंकी और हिम्मतसिंह चौहान को समाजरत्न सम्मान प्रदान किया गया।
गजपालसिंह राठौड़, डॉ. शैलेन्द्रसिंह शक्तावत, दीपेन्द्रसिंह शक्तावत, अशोकसिंह मेतवाला और बालूसिंह कानावत को क्षत्रिय गौरव सम्मान, जबकि प्रीति गजेन्द्रसिंह शक्तावत, एएसपी चेतना भाटी, माधवी राजेन्द्र सिसोदिया, डॉ. लक्ष्मी झाला और डॉ. रिश्ता चौहान को क्षत्राणी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कृष्णा तंवर गहलोत को वीर बेटी सम्मान (गेम चेंजर ओवर सम्मान) प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की कार्यकारिणी एवं आयोजन को सफल बनाने वाले सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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