Site icon 24 News Update

राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय : परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दिया देशभक्ति का संदेश अधिकारों के साथ दायित्वों की भावना से ही होगा राष्ट्र निर्माण – प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत

Advertisements

24 News Update उदयपुर। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय की ओर से 77वां गणतंत्र दिवस केंद्रीय स्तर पर एग्रीकल्चर महाविद्यालय परिसर में गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत एवं कुलाधिपति-कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान एनसीसी कैडेट्स, एयर विंग, होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय, फिजियोथेरेपी चिकित्सा महाविद्यालय, बीएड, एमएड, डीएलएड, ओसीडीसी, कन्या महाविद्यालय सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने देशभक्ति और राजस्थानी गीतों पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश दिया।
समारोह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता करने वाले एनसीसी कैडेट्स एवं गार्गी पुरस्कार से सम्मानित उत्कृष्ट विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।


संविधान अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है – कुलपति
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान केवल नागरिकों को अधिकार प्रदान नहीं करता, बल्कि उन्हें राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों का भी बोध कराता है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण की प्रक्रिया और उसमें निहित मूल भावनाएं राष्ट्र चरित्र और राष्ट्र बोध को सुदृढ़ करती हैं। प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि देश तभी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है, जब उसके नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समान प्राथमिकता दें। उन्होंने वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में संस्कारयुक्त, नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, योग, वेद और कौशल आधारित शिक्षा से युक्त युवा पीढ़ी तैयार कर ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान संभव है। मूल्यनिष्ठ शिक्षा ही भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त पहचान दिला सकती है।

भारत का संविधान देश की आत्मा है – कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर
इस अवसर पर कुलाधिपति-कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने कहा कि हजारों वीरों के बलिदान के बाद देश को स्वतंत्रता मिली और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र संचालन के लिए एक सशक्त और समृद्ध संविधान की आवश्यकता थी। संविधान निर्माताओं ने कठोर परिश्रम से विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान तैयार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान भारत की आत्मा है और संविधान निर्माताओं के योगदान के कारण ही भारत आज विश्व में एक महान और गौरवशाली लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संविधान का अध्ययन करें और उसकी मूल भावना को समझें।
संविधान की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए गुर्जर ने कहा कि संविधान की मर्यादा, उसकी मान्यताओं और मूल मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को नैतिकता, संस्कार और कौशल विकास से युक्त बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा और कौशल विकास के समन्वय से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।


कार्यक्रम का संचालन एवं उपस्थिति समारोह का संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया। रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. जी.एम. मेहता, प्रो. मलय पानेरी, डॉ. पारस जैन, प्रो. जीवनसिंह खरकवाल, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. अवनीश नागर, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. अमी राठौड, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. धर्मेन्द्र राजौरा, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. संतोष लाम्बा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. हिम्मत सिंह चुण्डावत सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Exit mobile version