24 News Update उदयपुर । राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी आगामी 14 सितम्बर, रविवार को उदयपुर प्रवास पर रहेंगी। इस अवसर पर वे राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय और प्रज्ञा प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘भारतीय चिंतन में महिला’ विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ करेंगी। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, भारतीय परंपरा और संस्कृति में महिला की भूमिका, तथा समकालीन सामाजिक संदर्भों पर गहन मंथन का मंच बनेगा।
आयोजन सचिव डॉ. युवराज सिंह राठौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंद कुमार होंगे। संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता पेसिफिक विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष प्रो. भगवती लाल शर्मा करेंगे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत करेंगे। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रख्यात विद्वान, शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल होंगे, जो महिला चिंतन पर भारतीय दृष्टिकोण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे।
डॉ. राठौड़ ने बताया कि संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों को प्रख्यात शिक्षाविद् और लेखक हनुमान सिंह राठौड़, दिल्ली उच्च न्यायालय की अधिवक्ता डॉ. मोनिका अरोड़ा, तथा राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. प्रवीण खंडेलवाल संबोधित करेंगे। इन सत्रों का उद्देश्य महिला के ऐतिहासिक योगदान, सामाजिक स्थिति और वर्तमान चुनौतियों को भारतीय विचारधारा के परिप्रेक्ष्य से समझना है। आयोजन सचिव प्रो. शिवानी स्वर्णकार ने बताया कि संगोष्ठी में कई महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श होगा, जिनमें भारतीय चिंतन में महिला का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, भारत में महिला का सांस्कृतिक संदर्भ, भारतीय महिला एवं समसामयिक चुनौतियां, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं मातृशक्ति, भारतीय चिकित्सा शास्त्र एवं मातृशक्ति, भारतीय न्याय संहिता एवं महिला, राजनीति एवं प्रशासन में महिला की भूमिका, महिला एवं मानवाधिकारों पर भारतीय दृष्टिकोण, राजस्थान की प्रमुख मातृशक्तियों का योगदान, तथा विभिन्न कालखंडों में पाश्चात्य एवं भारतीय दृष्टिकोण से महिला चिंतन का तुलनात्मक अध्ययन शामिल है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय सभ्यता और संस्कृति में महिला की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करना और भारतीय समाज में उनकी बदलती स्थिति का विश्लेषण करना है। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन युवा शोधार्थियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं को भारतीय दृष्टि से महिला सशक्तिकरण के विमर्श को समझने का सशक्त मंच प्रदान करेगा।
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