24 News Update Udaipur. भारत में मुख कैंसर तीन प्रमुख प्रकार के कैंसरों में से एक है। राष्ट्रीय मौखिक कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार देश में हर साल मुख कैंसर के लगभग 60 हजार और भारतीय कैंसर सोसायटी के अनुसार भारत में हर साल 1 लाख से ज़्यादा नए मुख कैंसर के मामले दर्ज होते हैं। यह भारत के शीर्ष कैंसरों में से एक है, जो सभी कैंसरों का लगभग 30-40% तक हिस्सा है। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ प्रांजल सिंह मदेरणा ने मुख कैंसर के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि मुख कैंसर का मुख्य कारण खैनी, गुटखा, तंबाकू, पान और सुपारी जैसे धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का अत्यधिक सेवन है। भारत में 70 प्रतिशत मरीजों में यह बीमारी तब तक सामने नहीं आती, जब तक वह गंभीर स्थिति में ना पहुंच जाए। शुरुआती अवस्था में मुख कैंसर का पता चलने पर इलाज की दर 90% तक हो सकती है, लेकिन बाद के चरणों में यह दर आधी से भी ज्यादा घटकर रह जाती है। अक्सर प्री-कैंसर वाले व्यक्ति भी इन बदलावों को नोटिस करते हैं जैसे कि ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF) में मुँह का कम खुलना, लेकिन वे इन बदलावों के कारणों और परिणामों से अनजान होते हैं। लोग शुरुआती लक्षणों जैसे सफेद या लाल धब्बे, लंबे समय तक ना भरने वाले छाले या बार-बार गले व जीभ में दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं। मुंह के कैंसर के ज्यादातर मामले तंबाकू चबाने से होते हैं। मुख कैंसर के कारणों और विशेषताओं के बारे में जागरूकता मुख कैंसर की रोकथाम, नियंत्रण और शीघ्र निदान में बहुत मददगार हो सकती है। लक्षण: मुंह खोलने में कठिनाई, मुख में अल्सर, मुख में सफेद और लाल धब्बे, दांतों का गिरना, आवाज़ में बदलाव, भोजन निगलने में कठिनाई और दर्द, गर्दन में सूजन, जलन या सूखापन समाधान व रोकथाम: डॉ प्रांजल के अनुसार भारत में इस समस्या से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। गांव-गांव और शहर-शहर तक जागरूकता अभियान चलाना। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मानक ओरल स्क्रीनिंग प्रक्रिया को लागू करना, तंबाकू और सुपारी जैसी चीजों पर कड़ाई से नियंत्रण और नशा-निवारण सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। मुख कैंसर जागरूकता: तंबाकू और पान-गुटखा के सेवन से जागरूकता की कमी भी मामलों में वृद्धि का एक कारण है। जागरूकता बढ़ाने के प्रमुख कारकों में तंबाकू और शराब जैसे सामान्य जोखिम कारकों और मुख कैंसर के शुरुआती लक्षणों जैसे कि घाव, गांठ या लगातार दर्द, के बारे में लोगों को शिक्षित करना शामिल है। समय पर निदान और रोकथाम के लिए मौखिक स्वास्थ्य पर जनता का ध्यान और नियमित मौखिक जाँच बेहद ज़रूरी हैं। नियमित जाँच: संभावित घातक घावों का शीघ्र पता लगाने के लिए दंत चिकित्सकों द्वारा नियमित दंत जाँच और मौखिक जाँच महत्वपूर्ण हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation देशभक्ति से ओतप्रोत रहा अग्र संगम-2025, सिन्दूर नृत्य और ऑपरेशन सिन्दूर की प्रस्तुतियों ने जगाया जज्बा नारी केवल परिवार नहीं, पूरे समाज की आधारशिला है : उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी