24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। नगर के ऋषभ वाटिका में आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा—जो शांत है वह संत है, जो अशांत है वह खत्म है।
नगर के ऋषभ वाटिका में सकल दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा द्वारा आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के पांचवें दिन शनिवार को उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि पलकों को झुकाकर जियो तो दुनिया तुम्हें पलकों पर बिठा देगी। ज्यादा अकड़कर मत जियो, झुककर जीना प्रारंभ करो। जो झुकता है वही जीवन में ऊपर उठता है, ज्यादा अकड़ोगे तो जड़ से काटे जाओगे। हाथों की दस उंगलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि हथेली की अंतिम उंगली सबसे छोटी होती है, लेकिन जब परमात्मा के सामने हाथ जोड़कर दर्शन करते हैं तो वही उंगली भगवान के सामने होती है। जिसका नेचर अच्छा है उसका फ्यूचर अच्छा होता है। आदमी को बदलने के लिए व्यवहार बदलने की जरूरत है, बड़ा बनने के लिए सर्वस्व समर्पित करना पड़ता है। परिवार में सभी सदस्य अहंकार का त्याग करेंगे तो परिवार में शांति कायम होगी।
सभा के पूर्व अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया, वहीं आचार्य पुलक सागरजी का पाद प्रक्षालन कीर्ति भाई शाह परिवार द्वारा किया गया। सीमा जैन व पिंकी जैन बांसवाड़ा द्वारा जिनवाणी भेंट की गई।
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