24 News Update उदयपुर/भींडर। रंग तेरस की रात भींडर में आस्था, उल्लास और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जहां श्री नृसिंह भगवान मंदिर में ब्रज की तर्ज पर भव्य फूलों की होली खेली गई। भक्त प्रहलाद धर्म जागरण सेवा समिति सुंदरकांड मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस फागोत्सव में हजारों श्रद्धालु उमड़े और ठाकुरजी के संग होली खेलकर सुख-समृद्धि की कामनाएं की।मंदिर के पट खुलते ही “नृसिंह भगवान के जयकारों” से पूरा परिसर गूंज उठा। इस बार आयोजन को खास बनाने के लिए करीब 5 क्विंटल फूलों से ठाकुरजी और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई, जिसने माहौल को अलौकिक बना दिया। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू, आकर्षक गुब्बारों की सजावट और दूधिया रोशनी ने मंदिर को दिव्य रूप दे दिया। भगवान नृसिंह का विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।फागोत्सव में देर रात तक भक्ति की धारा बहती रही। “बीच बजारों भींडर बैठा श्री नृसिंह भगवान, सवा रुपये की केसर में करे कल्याण” और “म्हारा नृसिंह भगवान ने खम्मा रे खम्मा” जैसे भजनों पर महिला-पुरुष, युवा और बच्चे झूमते नजर आए। डीजे और पारंपरिक भजनों के संगम ने आयोजन को और जीवंत बना दिया।श्रद्धालुओं का उत्साह ऐसा था कि मंदिर परिसर से लेकर आसपास की गलियों तक भीड़ उमड़ पड़ी। कई परिवार पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और एक-दूसरे पर फूल बरसाकर उत्सव की खुशियां साझा कीं। महाआरती में सैकड़ों लोगों ने एक साथ भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।आयोजकों ने व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए स्वयंसेवकों की टीम तैनात की, जिससे भीड़ के बावजूद आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। महाआरती के बाद महाप्रसाद का वितरण किया गया।देर रात तक भींडर की गलियां भजनों की गूंज और फूलों की खुशबू से महकती रहीं—मानो पूरा नगर नृसिंह भक्ति के रंग में डूब गया हो। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation स्वदेशी से ‘डिज़ाइन इन इंडिया’ तक: विद्यापीठ सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप तय गैस संकट पर सड़क पर उतरीं प्रीति शक्तावत, चूल्हे पर बनाई चाय