Site icon 24 News Update

तनाव में घिरे युवाओं के लिए नई पहल, “सत्व वेलबीइंग” का आगाज़, निःशुल्क मानसिक सहयोग और मार्गदर्शन

Advertisements

24 News Update उदयपुर। प्रतिस्पर्धा, पढ़ाई का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएँ और अकेलापन—इन सबके बीच आज का युवा मानसिक तनाव से जूझ रहा है। इसी बढ़ती चिंता के बीच माँ भगवती विकास संस्थान ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए “सत्व वेलबीइंग” नाम से एक नई सामाजिक पहल शुरू की है।
यह पहल विशेष रूप से 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए तैयार की गई है, जो जीवन के सबसे संवेदनशील दौर में मानसिक दबाव और भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

खुलकर संवाद को बढ़ावा दें, समाधान मिलेगा
सत्व वेलबीइंग का उद्देश्य युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, खुलकर संवाद को बढ़ावा देना और ऐसा सुरक्षित वातावरण बनाना है, जहां युवा बिना किसी डर या झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। इस पहल के तहत जागरूकता अभियान, संवाद सत्र, सामुदायिक गतिविधियां और मानसिक स्वास्थ्य मार्गदर्शन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बात—सभी सेवाएं निःशुल्क
आर्थिक स्थिति किसी भी युवा के लिए बाधा न बने, इसे ध्यान में रखते हुए सत्व वेलबीइंग के सभी प्रमुख कार्यक्रम और मार्गदर्शन सत्र पूरी तरह निःशुल्क रखे गए हैं। इस पहल का मूल मंत्र है—“संतुलित • उज्ज्वल • विकासशील”, जो युवाओं को सकारात्मक सोच और निरंतर आत्म-विकास की दिशा में प्रेरित करता है।

19 मार्च को होगा औपचारिक शुभारंभ
इस पहल का आधिकारिक शुभारंभ 19 मार्च 2026 को आयोजित एक विशेष सेमिनार के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा होगी और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की जाएगी।

विशेषज्ञों की टीम संभालेगी जिम्मेदारी
सत्व वेलबीइंग की कोर टीम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं— एकलिंग अग्रवाल (मुख्य कार्यकारी अधिकारी), पद्मिनी राठौड़ (मुख्य संचालन अधिकारी), व्योम उपाध्याय आंचल धाभाई (मनोवैज्ञानिक) चारु पालीवाल (मनोवैज्ञानिक) देवांश अग्रवाल इशिता जारोली

कोई युवा अकेला न रहे
मुख्य कार्यकारी अधिकारी एकलिंग अग्रवाल ने कहा कि आज कई युवा मानसिक संघर्षों से गुजर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर सही सहारा नहीं मिल पाता। इस पहल का उद्देश्य है कि हर युवा को अपनी बात कहने का मंच और सही मार्गदर्शन मिल सके, ताकि वह खुद को अकेला महसूस न करे।

Exit mobile version