24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के यूजीसी महिला अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम ‘मंडला’ (3 से 8 मार्च) के अंतर्गत प्रस्तुत की जा रही सामग्री को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में परिवार विरोधी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। है।
बुधवार को विश्वविद्यालय की छात्राओं ने प्रशासन के समक्ष प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में कम्युनिस्ट विचारधारा के आधार पर महिला बनाम परिवार का प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली हजारों छात्राएं आदिवासी एवं विविध पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं, और ऐसे कार्यक्रम उनके पारिवारिक मूल्यों पर आघात कर रहे हैं।
परिवार से संबंध तोड़ने की साजिश का आरोप
छात्राओं के अनुसार, कार्यक्रम के तहत माता-पिता पर दोषारोपण करने, विवाह को महिलाओं की प्रगति में बाधा बताने और परिवार से अलग होकर एनजीओ के साथ जुड़ने जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र निदेशक सुधा चौधरी एवं अन्य आयोजक उन्हें ‘रिबेल किड्स’ बनने और परिवार से अलग होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
प्रसिद्ध महिला व्यक्तित्वों से प्रेरणा देने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने मांग की है कि महिलाओं की शिक्षा और अवसरों को प्रोत्साहित करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, वीरांगना कालीबाई, द्रौपदी मुर्मू, कल्पना चावला और साइना नेहवाल जैसी हस्तियों के जीवन पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में परिवार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक इकाई होता है और इसकी अवधारणा ‘अर्धनारीश्वर’ के सिद्धांत पर आधारित है, जहां पुरुष और महिला पूरक होते हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के तहत रुथ प्रॉवेर झाबवाला द्वारा लिखित पुस्तक ‘इनसाइड द हवेली’ को पढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जो मेवाड़ राजपरिवार की छवि धूमिल करने का प्रयास है। इस पुस्तक में यह दिखाया गया है कि मेवाड़ राजपरिवार में बहुओं की स्वतंत्रता का दमन किया जाता था, जो छात्रों के अनुसार वास्तविकता से दूर है।
इसके अलावा, ‘दास्तान-ए-गोई’ सत्र के लिए सैयद साहिल आगा को आमंत्रित किया गया है, जो पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंदुओं को ‘तुगलक’ कहने के लिए विवादों में रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि इस तरह के साम्प्रदायिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को बुलाने से विश्वविद्यालय में अशांति फैल सकती है।
कुलपति से कार्रवाई की मांग
छात्राओं ने कुलपति सुनीता मिश्रा से मांग की है कि विवादास्पद कार्यक्रमों और उनमें शामिल फेकल्टी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे विषयों पर बहस होनी चाहिए जो जोड़ने वाले हों, न कि विभाजन और नफरत फैलाने वाले। साथ ही, उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय में स्क्रीनिंग के लिए ‘मणिकर्णिका’ या ‘नीरजा’ जैसी प्रेरणादायक फिल्में दिखाई जाएं, और चर्चा के लिए ‘महिला-पुरुष एक दूसरे के पूरक’ या ‘परिवार एक इकाई’ जैसे विषय रखे जाएं। छात्राओं ने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं के अधिकारों की समर्थक हैं, लेकिन वे समाज और परिवार को तोड़ने की साजिशों के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहेंगी।
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