-भारत 2024 से 2035 के बीच तेल की वैश्विक मांग का 40 प्रतिशत से अधिक और प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 8 प्रतिशत के वृद्धि में योगदान करेगा24 News Update उदयपुर। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौरान आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम को कम करने और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।केंद्रीय राज्य मंत्री ने राज्यसभा में सांसद चुन्नीलाल गरासिया द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। श्री गरासिया ने मंत्रालय से यह जानकारी मांगी थी कि भारत की समग्र ऊर्जा खपत में अनुमानित वृद्धि को देखते हुए अगले 10-15 वर्षों के दौरान देश में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की अनुमानित मांग क्या है तथा आयात स्रोतों के विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों के विस्तार और घरेलू अन्वेषण एवं उत्पादन को प्रोत्साहन सहित दीर्घकालिक हाइड्रोकार्बन आपूर्ति सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार कई कदम उठा रही है जिनमें कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाना, संघर्षरत् क्षेत्रों से बचना और प्रमुख तेल उत्पादक देशों तथा अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए), पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच (आईईएफ) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ राजनयिक संबंधों को मजबूत करना शामिल है।केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि भारत की सुदृढ़ आर्थिक प्रगति के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह वर्ष 2035 तक वैश्विक ऊर्जा मांग में वृद्धि का एक प्रमुख चालक बना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार भारत वर्ष 2024 से वर्ष 2035 के बीच तेल की वैश्विक मांग का 40 प्रतिशत से अधिक और प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 8 प्रतिशत के वृद्धि में योगदान करेगा, जबकि ओपेक का अनुमान है कि इसी अवधि में तेल में भारत की हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत और गैस में 10 प्रतिशत होगी।सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) नामक एक विशेष प्रयोजनार्थ कम्पनी के माध्यम से 5.3 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) की कुल क्षमता वाली कार्यनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) सुविधाएं स्थापित की हैं, जो अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए बफर का काम कर सकती हैं। पेट्रोलियम भंडार की क्षमता को और बढ़ाने के लिए सरकार ने जुलाई 2021 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर 6.5 लाख मीट्रिक टन (एमएमटी) की कुल भंडारण क्षमता वाली दो अतिरिक्त सुविधाओं की स्थापना को भी मंजूरी दी थी, जिनमें से 4 लाख मीट्रिक टन ओडिशा के चांदीखोल में और 2.5 लाख मीट्रिक टन कर्नाटक के पादुर में स्थापित की जाएंगी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की कार्रवाई: 8 हुक्का जब्त, संचालक गिरफ्तार बाहुबली हिल पर भीषण आग, धुएं में फंसा रतलाम का टूरिस्ट माखन सिंह, डेढ़ घंटे के रेस्क्यू के बाद फायर टीम ने बचाई जान