24 News Update उदयपुर। राज्य ओबीसी आयोग के समक्ष सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने कहा कि 2013 में अशोक गहलोत की सरकार ने अनुसूचित क्षेत्र में आरक्षण संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर सामाजिक विद्वेष बढ़ाया है। इससे सामाजिक सद्भाव टूटा है।
सांसद ने बताया कि 16 जून 2013 की अधिसूचना के लिए वास्तव में जनजाति परामर्शदात्री परिषद ने अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण में ही अनुसूचित क्षेत्र के जनजातियों को राज्य सेवाओं तक आरक्षण देने की बात कही थी, परंतु कांग्रेस सरकार ने इसकी विपरीत अनुसूचित क्षेत्र में एक छोटा कर राज्य का 9 हिस्सा अलग कर दिया। ऐसे में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था समाप्त हो गई और एससी का आरक्षण 16 प्रतिशत घटकर मात्र 5 प्रतिशत रह गया। आदिवासियों को भी सीटों की हानि हुई। इस व्यवस्था से आदिवासियों को एसटी का आरक्षण लगभग 3 प्रतिशत ही रह गया जबकि 6 प्रतिशत से अधिक सीटें मिलनी थी।
सांसद रावत ने आग्रह किया कि अशोक गहलोत सरकार द्वारा कांग्रेस सरकार द्वारा 2013 में जारी किए गये सिद्धांत एवं 2014 में बने अनुसूचित क्षेत्र सेवा नियमों को समाप्त कर राज्य को यूनिट बनाकर क्षेत्र के पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आरक्षण दिया जाए। इससे अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासी युवाओं को जनसंख्या के अनुपात में राज्यसभा सहित सभी सेवाओं में आरक्षण मिलेगा एवं साथ ही ओबीसी व अनुसूचित जातियों को क्रमश: 27 एवं 16 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी कायम हो सकेगी।
राज्य ओबीसी आयोग के समक्ष सांसद डॉ रावत ने गहलोत सरकार द्वारा जनजाति का आरक्षण घटाने को लेकर जताई चिंता

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