उदयपुर। उदयपुर में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) शहर कमेटी द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रही, बल्कि वर्तमान राजनीतिक-सामाजिक हालात पर की चर्चा का भी मंच बनी। । शिराली भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था— “भगत सिंह का राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम संदेश और हमारा दायित्व”। कार्यक्रम की अध्यक्षता रानू सालवी और दामोदर कुमावत ने की, जबकि मंच संचालन अमजद शेख ने किया। मुख्य वक्ता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के शोधार्थी पवन बेनीवाल ने कहा कि भगत सिंह को केवल एक ‘शहीद’ के रूप में याद करना उनके विचारों के साथ अन्याय है। उन्होंने बताया कि अपने अंतिम दिनों में लिखे गए पत्रों में भगत सिंह ने स्पष्ट किया था कि वे बम-पिस्तौल के प्रतीक नहीं, बल्कि एक वैचारिक योद्धा थे, जो अन्यायपूर्ण व्यवस्था को जड़ से खत्म कर समाजवादी ढांचा स्थापित करना चाहते थे।उन्होंने कहा कि “इंकलाब जिंदाबाद” का असली अर्थ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक ढांचे का आमूलचूल परिवर्तन है—जहां किसान और मजदूर सत्ता के केंद्र में हों। माकपा के साबरकांठा (गुजरात) जिला सचिव दिनेश भाई परमार ने साम्राज्यवाद को आज भी दुनिया का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा कि आजादी के दशकों बाद भी हालात बदले नहीं हैं। “जो अन्न उगाता है, वही भूखा है और जो घर बनाता है, वह खुद बेघर है”—यह विडंबना आज के सिस्टम की सच्चाई है। उदयपुर जिला सचिव राजेश सिंघवी ने अपने भाषण में ऐतिहासिक और वैचारिक तुलना करते हुए कहा कि जहां महात्मा गांधी ने अमीर-गरीब के सह-अस्तित्व की कल्पना की, वहीं भगत सिंह ने साफ कहा कि शोषणकारी ढांचे में यह संभव नहीं। उन्होंने भगत सिंह के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा—“क्रांति बंदूक की नहीं, विचारों की धार से होती है।”सिंघवी ने यह भी कहा कि भगत सिंह ने 1931 में ही चेतावनी दे दी थी कि जब तक मजदूर-किसान की आय पर पूंजीपतियों का एकाधिकार खत्म नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। कार्यक्रम में वैश्विक राजनीति पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज का “नया साम्राज्यवाद” लोकतंत्र और मानवाधिकार के नाम पर दुनिया के संसाधनों पर कब्जा कर रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों का हवाला देते हुए कहा गया कि गाजा जैसे क्षेत्रों में हो रही हिंसा और संसाधनों की लूट आधुनिक साम्राज्यवाद का चेहरा है। एडवोकेट ललित मीणा ने भगत सिंह को आज के युवाओं का सबसे बड़ा मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि संकट के समय उनके विचार दिशा दिखाते हैं। ठेला यूनियन सदस्य संतोष सालवी ने कहा कि भगत सिंह को जानने के लिए उनके लेखन को पढ़ना और समझना जरूरी है।नेशनल होकर फेडरेशन के राज्य संयोजक याकूब मोहम्मद ने “सांप्रदायिकता और उसका इलाज” का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना ही भगत सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि है। छात्राओं हिमांशी सालवी और नंदिनी सालवी ने भगत सिंह का जीवन परिचय प्रस्तुत कर युवाओं में जोश भरा। विजयपाल परमार ने कहा कि भगत सिंह की शहादत ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति दी और संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण का सवाल राष्ट्रीय विमर्श में जोड़ा। पूर्व टाउन वेंडिंग कमेटी सदस्य रानू सालवी ने वर्तमान सामाजिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में बढ़ती नफरत के बीच प्रेम और भाईचारे की जरूरत पहले से ज्यादा है। वहीं पूर्व पार्षद राजेंद्र वसीटा ने भगत सिंह के बलिदान को सच्ची क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा कि असली और दिखावटी देशभक्ति में फर्क समझना जरूरी है। कार्यक्रम में रघुनाथ सिंह भाटी, विनोद दया, वरजु देवी, अनिल पणोर, अब्दुल मजीद, सागर मीणा, मुन्नवर खान, भला भाई खांट, सूरज सिंह झाला, राकेश तरार, सूरज सिंह चौहान, दिलावर सिंह झाला, सोहन सिंह झाला, पुरुषोत्तम परमार सहित कई कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर में U-20 कुश्ती दंगल में उभरे भविष्य के चैंपियन जयपुर में शिक्षकों का मंथन”-प्रदेशभर में महासदस्यता अभियान का ऐलान, मांगों पर तेज होगा संघर्ष