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आईसीआईसीआई बैंक मैनेजर का पद छोड़ संयम मार्ग पर अग्रसर, कोमल जैन 6 मई को लेंगी दीक्षा

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24 News Update सिरोही। जिले की रेवदर तहसील के भटाना गांव की 31 वर्षीय सीए कोमल जैन ने सांसारिक जीवन त्यागकर आध्यात्मिक मार्ग चुनने का निर्णय लिया है। आईसीआईसीआई बैंक में मैनेजर पद पर कार्यरत रहीं कोमल जैन 6 मई को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी। यह दीक्षा समारोह आचार्य भगवंत गुणरत्नसूरीजी परंपरा के आचार्यदेव रविरत्नसूरीजी एवं आचार्य जयेशरत्नसूरीजी की पावन निश्रा में संपन्न होगा।
कोमल जैन के पिता पुखराज परमार सूरत में कपड़ा व्यवसायी हैं। परिवार के अनुसार भटाना गांव से अब तक सात युवतियां साध्वी बन चुकी हैं, जबकि एक युवक मुनिराज के रूप में दीक्षित हुआ है। कोमल जैन इस गांव से दीक्षा लेने वाली आठवीं मुमुक्षा होंगी।

497वीं शिष्या के रूप में होंगी शामिल
दीक्षा के बाद कोमल जैन तपस्वीरत्न साध्वी धर्मांगरेखाश्रीजी की सुशिष्या बनेंगी। वे गुरुमाता प्रवर्तिनी पुण्यरेखाश्रीजी के विशाल संघ की 497वीं शिष्या के रूप में शामिल होंगी।

आध्यात्मिक झुकाव ने बदली जीवन दिशा
कोमल जैन ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि “संसार एक सपना है, संयम का मार्ग ही सत्य का मार्ग है।” उन्होंने बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई और बैंक में नौकरी के बावजूद उनका मन हमेशा जैन धर्म, साधना और आत्मकल्याण की ओर आकर्षित रहा। पालीताणा में उपधान के दौरान उन्हें आध्यात्मिक अनुभव हुआ, जिसके बाद उन्होंने संस्कृत, कर्मग्रंथ, जीव विचार और नवतत्व शास्त्र का अध्ययन कर दीक्षा का संकल्प लिया।

परिवार ने दिया पूरा समर्थन
कोमल जैन ने अपने निर्णय का श्रेय माता-पिता को देते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही श्रेष्ठ संस्कार मिले और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। परिवारजनों ने भी उनके इस निर्णय पर गर्व व्यक्त करते हुए आशीर्वाद दिया।

दीक्षा महोत्सव के तहत विविध आयोजन
दीक्षा से पूर्व भटाना गांव में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोमवार को आचार्य भगवंतों का भव्य मंगल प्रवेश होगा। मंगलवार को वर्षीदान वरघोड़ा निकलेगा और बुधवार को शुभ मुहूर्त में दीक्षा समारोह संपन्न होगा। इस अवसर पर साध्वी धर्मांगरेखाश्रीजी के 100 वर्धमान तप की ओली का पारणा भी आयोजित किया जाएगा, जिससे जैन समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाजजन इस महोत्सव में शामिल होने पहुंचेंगे। गांव की लगभग 100 घरों की जैन बस्ती ने पूरे भटाना को विशेष रूप से सजाया है, जिससे यह आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त कर रहा है।

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