24 News Update जयपुर/उदयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस के दौरान उदयपुर फाइल्स भी चर्चा में आ गई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर सवाल दागे और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, जबकि पीड़िता और आरोपी दोनों ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं।
सदन में बोलते हुए जूली ने कहा कि सरकार को इस प्रकरण की गहराई से जांच करवानी चाहिए और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “एपस्टिन फाइल छोड़ दीजिए, उससे भी बड़ी फाइल है, उसकी जांच करवाइए। मैं सदन की मर्यादा रख रहा हूं, वरना एक-एक परत यहीं खुल सकती है।”
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि उदयपुर में दर्ज इस मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रात करीब 11 बजे एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस टीम देर रात मौके पर पहुंची और कार्रवाई की। जूली के अनुसार बिना महिला पुलिस के घर का दरवाजा तोड़कर गिरफ्तारी की गई, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस द्वारा जब्त किए गए सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन जैसे अहम सबूतों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। जूली ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बाद सबूतों को तय प्रक्रिया के अनुसार अपलोड किया जाना चाहिए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
नेता प्रतिपक्ष ने सदन में यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले को लेकर सीधे दिल्ली से उदयपुर आईजी को फोन गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर इस पूरे प्रकरण में क्या ऐसा है जिसे दबाया जा रहा है और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करवाई जा रही।
सदन में अन्य मुद्दों पर भी हुई तीखी बहस
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच कई अन्य मुद्दों पर भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली। रोडवेज की स्थिति, परवन सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। वहीं परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा और अन्य मंत्रियों ने इन आरोपों का जवाब देते हुए पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया। सदन में इन मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर देर तक चलता रहा।
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