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शाहपुरा में विद्यार्थियों ने समझी ‘सीवेज से संसाधन’ की तकनीक: एफएसटीपी का मैदानी पाठ, 5 साल में सेप्टिक टैंक सफाई का संदेश

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24 News Update शाहपुरा। शाहपुरा में स्वच्छता और तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला, जब 21 फरवरी 2026 को छात्रों ने जहाजपुर रोड स्थित निर्माणाधीन फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) का शैक्षणिक भ्रमण किया। यह कार्यक्रम राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के सामुदायिक जागरूकता एवं जन सहभागिता अभियान के तहत आयोजित किया गया।

तकनीक की जमीनी समझ
आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय गांधी नगर के विद्यार्थियों को नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता प्रहलाद गुलपारिया ने एफएसटीपी की कार्यप्रणाली विस्तार से समझाई। छात्रों ने प्लांट की प्रमुख इकाइयों—प्राइमरी ट्रीटमेंट यूनिट, एमबीआर (मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर), स्टेबलाइजेशन टैंक, स्क्रू प्रेस और स्लज ड्रायर—की तकनीकी भूमिका को नजदीक से जाना। उन्हें बताया गया कि घरों से निकला फीकल स्लज वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजरकर कैसे सुरक्षित निपटान और उपयोगी उत्पाद में बदला जाता है।

सेप्टिक टैंक सफाई की प्रक्रिया और शुल्क
जयपुर कैप इकाई के डिप्टी टीम लीडर अनिल सिंह ने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि शहरवासी अपने सेप्टिक टैंक या शोकपिट की सफाई नगर पालिका में निर्धारित 1500 रुपये शुल्क जमा करवा कर करवा सकते हैं। उपचारित स्लज को खाद के रूप में खेतों में उपयोग किया जाएगा, जिससे गंदगी और खुले निस्तारण की समस्या से राहत मिलेगी तथा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने परिवारों को प्रेरित करें कि सेप्टिक टैंक हर पांच वर्ष में अनिवार्य रूप से खाली करवाएं। इस संबंध में जानकारी और सेवा के लिए टोल-फ्री नंबर 18002578182 उपलब्ध है।

स्वच्छता और जनजागरूकता पर जोर
कैप इकाई के सीएमई सौरभ पाण्डे ने एफएसटीपी के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी लाभों पर प्रकाश डाला तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में सहायक सामाजिक विकास एवं जेंडर स्पॉट अधिकारी महेंद्र सिंह राणावत सहित विद्यालय के अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की।

‘वेस्ट टू वैल्यू’ की दिशा में कदम
एफएसटीपी जैसी परियोजनाएं शहरी स्वच्छता प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार देती हैं—जहां अपशिष्ट को संसाधन में बदला जाता है। शाहपुरा में आयोजित यह भ्रमण न केवल तकनीकी शिक्षा का हिस्सा बना, बल्कि विद्यार्थियों के माध्यम से घर-घर स्वच्छता का संदेश पहुंचाने की पहल भी साबित हुआ।

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