24 News Update नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बाद 19 मार्च को कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस दोनों में करीब 30% तक तेजी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चिंता में डाल दिया है। सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ने की आशंका है, जहां कच्चे तेल की कीमतें युद्ध के बाद तेजी से बढ़ते हुए 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल-डीजल के दाम 10 से 15 रुपए तक बढ़ सकते हैं।भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल और आधे से ज्यादा प्राकृतिक गैस आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में हर हलचल सीधे आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। भारत इराक, सऊदी अरब, रूस और यूएई जैसे देशों से तेल खरीदता है, जिनकी कीमतों के औसत को ‘इंडियन बास्केट’ कहा जाता है। आम आदमी पर सीधा असरकच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सबसे पहला असर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 73 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। तेल कंपनियां फिलहाल अपने मार्जिन घटाकर कीमतों को संभाल रही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा। यदि अगले कुछ हफ्तों तक कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो सरकार को ईंधन के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। महंगाई की दूसरी लहर का खतरातेल महंगा होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जी, अनाज और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी चढ़ेंगे। पेंट, प्लास्टिक, उर्वरक और दवाइयों जैसे उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं, जिससे आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगड़ने की आशंका है। इस संकट का असर यूरोप में और ज्यादा तीखा दिखाई दे रहा है। डच टीटीएफ गैस बेंचमार्क में एक समय 30% तक उछाल आया और कीमतें 70 यूरो तक पहुंच गईं। वहीं ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें 140% तक बढ़ चुकी हैं, जो पिछले दो साल के उच्चतम स्तर पर हैं। सप्लाई पर दोहरा झटकाऊर्जा संकट के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं। पहली, कतर के रास लफ्फान एलएनजी प्लांट को नुकसान, जो दुनिया की करीब 20% गैस सप्लाई संभालता है। दूसरी, फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला रणनीतिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग ठप हो जाना। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री रास्ता दुनिया के 20% पेट्रोलियम सप्लाई का प्रमुख मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का करीब आधा कच्चा तेल और 50% से ज्यादा एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। मौजूदा हालात में यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जिससे सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है। क्या कहती है सरकारकेंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने फिलहाल देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित बताया है, लेकिन संकेत साफ हैं—अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो महंगाई की नई लहर देश के दरवाजे पर दस्तक दे सकती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation रेलमंत्री बोले—60 हजार करोड़ की सब्सिडी, बढ़ेंगे जनरल कोच ईरान-इजराइल संघर्ष की आंच भारत तक: प्रीमियम पेट्रोल महंगा, आम उपभोक्ता पर अभी सीमित असर