24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। राष्ट्र है तो व्यक्ति है, समाज है, धर्म है और परिवार है—ये विचार आचार्य पुलक सागर महाराज ने नगर के ऋषभ वाटिका में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में व्यक्त किए। आचार्य ने कहा कि दुनिया में दो ही प्रकार के लोग याद रखे जाते हैं—एक वे जो कुछ लिखकर जाते हैं और दूसरे वे जिन पर बहुत कुछ लिखा जाता है। राम, कृष्ण, महावीर और बुद्ध ने अपने जीवन में कुछ नहीं लिखा, लेकिन इन महापुरुषों पर आज भी बहुत कुछ लिखा जा रहा है।
आचार्य ने कहा कि भगवान राम ने स्वयं कुछ नहीं लिखा, लेकिन वाल्मीकि, तुलसीदास, रविसेन की पद्मपुराण और जीणसेन की आदिपुराण जैसी रचनाएं राम पर लिखी गईं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति हमारे भीतर जागृत होनी चाहिए। पार्टीबाजी या किसी पंथवाद में नहीं जाना है, केवल भारत देश को मजबूत बनाना है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक जो भी है, वह सब सनातनी है।
आचार्य ने कहा कि भारत की इस धरती को भारत माता के नाम से जाना जाता है। जब तक भारत में डॉ. हेडगेवार और गुरुजी जैसे सपूतों का नाम है, तब तक कश्मीर जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे हाथों की लकीर है। अपनी तकदीर किसी और को कैसे दे सकते हैं।
उन्होंने गीता को पवित्र ग्रंथ बताते हुए कहा कि गीता न महलों में लिखी गई और न जंगलों में, बल्कि युद्ध के मैदान में लिखी गई, जहां से अहिंसा, शांति और आत्मा की अमरता का संदेश मिलता है। आचार्य ने कहा कि जब वे संघ के बीच बोलते हैं तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे भारत के बीच बोल रहे हों। संघ कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है, न ही यह वोट बैंक की राजनीति करता है। संघ देश को मजबूती देने वाले सच्चे सपूतों का संगठन है।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों में हिंदू समाज के लोग हैं, ऐसे में हिंदू सम्मेलन में हिंदुओं के हित की बात करना सांप्रदायिक कैसे हो सकता है। अतीत की भूलों से सीख लेकर भविष्य का निर्माण करना ही हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य है। आज जनजातीय क्षेत्रों में हिंदू को हिंदू से तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ऐसे समय में हिंदू सम्मेलन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आचार्य ने कहा कि भारत देश जाति, पार्टी और क्षेत्र में बंटता जा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भारत को भारत ही रहने दिया जाए, जातियों में बांटने का प्रयास न किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में हिंदू हैं तो गौहत्या क्यों हो रही है, भारत माता को अपशब्द क्यों कहे जाते हैं और तिरंगे का अपमान क्यों होता है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोग लाइन में खड़े हो जाते हैं, लेकिन वंदे मातरम् गाने के समय पीछे क्यों हट जाते हैं।
प्रारंभ में चित्तौड़ प्रांत प्रचारक मुरलीधर ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में 80 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। सम्मेलन के प्रारंभ में 18 हजार दशा हुमड़ समाज के अध्यक्ष दिनेश खोड़निया ने स्वागत उद्बोधन दिया।
बांसवाड़ा विभाग प्रचारक विकास राज, जिला प्रचारक निखिल, नगर संघचालक उमाकांत व्यास, अनुराग पाठक, सेठ महेश नोगामिया, कीर्ति भाई शाह, पवन गोवाडिया, वैभव गोवाडिया, नपा अध्यक्ष आशीष गांधी, पूर्व सांसद कनकमल कटारा, श्याम भट्ट, केपी सिंह, यशवंत गवारिया, बदामीलाल मेहता, दिलीप कोठारी, नानालाल दर्जी, प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया, ब्रह्मचारी सुरेश भैया, प्रकाश व्यास, जितेंद्र खटीक, जलज पंड्या, कुलदीप गांधी, विजयकुमार जैन, देवशंकर सुथार, जितेंद्र सुथार, हरीश सोमपुरा, दिनेश जांगा एवं चंद्रशेखर संघवी सहित बड़ी संख्या में संघ कार्यकर्ता व नागरिक उपस्थित रहे।
राष्ट्र है तो व्यक्ति है, समाज है, धर्म है, परिवार है — आचार्य पुलक सागर महाराज

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