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विकृतियों को मिटाने के लिए मानव में जागृति की आवश्यकता – साध्वी गरिमा भारती

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24 News Update सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। महिपाल विद्यालय खेल मैदान में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय कथा के चौथे दिन भगवान शिव कथा का रसास्वादन करवाते हुए आशुतोष महाराज जी की शिष्या सुश्री गरिमा भारती ने प्रभु की पावन कथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि काकभुशुण्डी जी ने गरुड़ जी को, याज्ञवल्क्य जी ने भरद्वाज जी व अन्य ऋषि-मुनियों को तथा भगवान शिव जी ने माता पार्वती को यह कथा सुना कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। उन्होंने कहा कि जब माता पार्वती सती रूप में संदेह के कारण भगवान शिव पर विश्वास नहीं कर पाती हैं, तो संदेह के परिणामस्वरूप उनका भगवान शिव से वियोग हो जाता है। जब आदि शक्ति को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिए महाराज हिमवान एवं माता मैना ने घोर तप किया, तब आदि शक्ति ने प्रसन्न होकर पुत्री रूप में उन्हें प्राप्त होने का वरदान दिया। आज समाज में पुत्री जन्म को शुभ नहीं माना जाता। समाज का शिक्षित वर्ग भी कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध को सहमति देता है। पुत्र की आकांक्षा आज समाज में फैले असंतुलन का कारण बन रही है। रक्षा बंधन, नवरात्रि जैसे पर्वों में कन्या की कंजकों के रूप में पूजा की जाती है, परंतु यह पावन संस्कृति संकट में पड़ गई है। कन्या प्रत्येक परिवार के लिए कितना महत्व रखती है, आज का समाज उस महत्व को भूल चुका है।
उन्होंने कहा कि हमें संस्कृति की रक्षा एवं समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए जागना होगा, जो जागृति भीतर से ब्रह्म के साथ जुड़ने के बाद ही संभव है। भगवान शिव द्वारा की गई कामदहन की लीला हमें वासनाओं से ग्रसित युवाओं द्वारा समाज में उत्पन्न दयनीय स्थिति की ओर संकेत करती है। युवाओं के मन में उठने वाली कामनाओं एवं वासनाओं के कारण नारी शोषण जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।
सर्वश्री आशुतोष महाराज जी ब्रह्मज्ञान प्रदान कर भगवान शिव के समान दोनों भृकुटियों के मध्य स्थित अग्नि नेत्र को उजागर कर युवाओं के भीतर उठने वाली वासनाओं पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहे हैं। भगवान शिव को जानकर ही सत्यम्, शिवम्, सुंदरम् के पथ पर अग्रसर हुआ जा सकता है। शिव को जाने बिना मानव का जीवन संपूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तित नहीं हो सकता। जिस प्रकार हर वस्तु का एक आधार होता है, उसी प्रकार मानव जीवन का आधार परमात्मा है। इस अवसर पर नगर सहित आसपास एवं उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर सहित दूर-दूर से भक्त उपस्थित रहे।

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