24 News Update उदयपुर। उदयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शंकरलाल बामणिया से जुड़े प्रकरण में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर नया मोड़ सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा जांच की अनुमति दिए जाने की खबरों के बीच डॉ. बामणिया ने स्पष्ट किया है कि अभी तक उनके खिलाफ न तो कोई औपचारिक प्रकरण दर्ज हुआ है और न ही विधिवत अनुसंधान की प्रक्रिया पूरी हुई है। ऐसे में अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया पर उन्होंने गंभीर कानूनी सवाल उठाए हैं।डॉ. बामणिया के अनुसार उनके स्थानांतरण को लेकर मामला पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा है और न्यायालय से उन्हें स्थगन आदेश प्राप्त है। इसी के बाद विभाग की ओर से मई 2025 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वित्त निदेशक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम को उदयपुर स्थित CMHO कार्यालय भेजा गया था। तीन सदस्यीय जांच और आंतरिक ऑडिट की सिफारिशडॉ. बामणिया का कहना है कि इस जांच टीम ने दो भागों में रिपोर्ट तैयार की थी। पहले भाग में एनएचएम के अंतर्गत हुई खरीद और एमएमवी वाहनों के भुगतान से जुड़े मामलों की पड़ताल की गई, जबकि दूसरे भाग में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के तथ्यों का सत्यापन किया गया। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा कि मामले में किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आंतरिक अंकेक्षण (इंटरनल ऑडिट) करवाया जाना उचित रहेगा।उनका दावा है कि विभाग को पहले आंतरिक ऑडिट कराना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी को पत्र भेज दिया गया। बिंदुवार जवाब दे चुका हूंडॉ. बामणिया ने कहा कि जांच रिपोर्ट के हर बिंदु का जवाब वे विभाग को दे चुके हैं और उनके अनुसार किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या पद के दुरुपयोग का मामला नहीं बनता। उनका कहना है कि यदि कोई संदेह है तो विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत पहले विस्तृत जांच और ऑडिट होना चाहिए। कानूनी प्रक्रिया पर प्रश्नडॉ. बामणिया का कहना है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा जांच शुरू करने से पहले सामान्यतः अनुसंधान और प्रकरण दर्ज होना आवश्यक होता है। उनके अनुसार अभी तक न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही विधिवत जांच हुई है, इसलिए अभियोजन स्वीकृति की चर्चा कानूनी रूप से सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे इस पूरे मामले में कानूनी विकल्पों का सहारा लेकर न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे। विभाग में चर्चा, पर निर्णय बाकीउधर चिकित्सा विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइल प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार तय होगी। फिलहाल डॉ. अशोक आदित्य के पास विभागीय प्रशासनिक अधिकार हैं, जबकि डॉ. बामणिया न्यायालय के आदेश के आधार पर पदस्थ हैं। कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी लोक सेवक के खिलाफ कार्रवाई में प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और जांच की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने सरकार ने खाद्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया: केंद्रीय राज्य मंत्री ‘एक जिला–एक खेल’ में तैराकी से उभर रहीं नई प्रतिभाएं: गोगुन्दा, सायरा व देवला ब्लॉकों में 130 से अधिक तैराकों ने दिखाई दमदार प्रतिभा