24 News Update सागवाड़ा। नगर के आसपुर मार्ग लोहारिया तालाब के सामने स्थित कान्हडदास दास धाम बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास में शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत तिलकराम ने सत्संग में बताया कि भक्त प्रहलाद भगवान से प्रार्थना करते हैं कि मेरा किसी भी योनि में जन्म हो वहां मुझे भगवान की भक्ति मिले। भगवान सदा भक्तों के दास रहते हैं तथा निष्काम भक्ति वालो से भगवान प्रेम करते है।
संत ने कहा ध्यान करना अलग-अलग प्रकार का होता है कोई खड़े रहकर प्रणाम करता है कोई दंडवत तो कोई समाधि में रहकर प्रणाम करता है । गुरू ही भगवान की भक्ति की पहचान करवा सकता है जिसे हीरे की पहचान जौहरी ही कर सकता है। जैसा विचार होगा वैसा ही ज्ञान होगा । भगवान का आरंभ व अंत नहीं है जिसका कभी अंत नहीं होता वही प्रकाश है । धरती पर जब-जब अधर्म का बोलबाला होता है तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है । भगवान चारों दिशाओं में विद्यमान है इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्रा सच्चे मन की भक्ति ही है । प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर भगवान कहीं भी प्रकट हो सकते हैं । धर्म व्यक्ति को अंदर से एकजुडटता का भाव पैदा करता है वही संप्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक बनाता है । यह संसार भगवान का एक सुन्दर बगीचा है। संत ने राम नाम का जाप सबसे सरल और प्रभावी उपाय है जो व्यक्ति एकाग्रता से सत्संग का श्रवण करता है ,वह जीवन के दु:खों से मुक्त होकर आत्मिक शांति प्राप्त करता है । सत्संग में कहीं बातों को जीवन में उतारना ही सच्चे सुख की ओर ले जाता है । सांसारिक वस्तुओं में सुख केवल आभास होता है । आत्मिक सुख शास्त्रों एवं सत्संग के श्रवण और आचरण से ही मिलता है । चातुर्मास का मुख्य उद्देश्य यही है कि व्यक्ति व्यस्त जीवन से समय निकालकर आत्मनिरीक्षण करें और धर्म की ओर बढे । सच्चा सुख चाहिए तो हमें शास्त्रो का श्रवण करे। प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया संत प्रसाद निरंजनप्रकाश पंचाल परिवार का रहा। सत्संग में नाथू परमार ,विष्णु भावसार, रमेश राठौड़, सुरेंद्र शर्मा के अतिरिक्त संगीता सोनी, राजेश्वरी शर्मा, प्रेमलता भट्ट ,पुष्पा सेवक, संगीता सोनी, गुलाब भावसार, बदी मीणा, प्रेमलता पंचाल ,लक्ष्मी सोनी, प्रेमलता सुथार सहित रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे।
निष्काम भक्ति वालों से भगवान प्रेम करते हैं -संत तिलकराम महाराज

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