Site icon 24 News Update

सज्जनगढ़ की वादियों में पहली बार गूंजेगा “वन मेला” 17–18 को जैव विविधता और वन उत्पादों का अनूठा उत्सव

Advertisements

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर अब वन संपदा और जैव विविधता के भव्य उत्सव का साक्षी बनने जा रही है। वन विभाग की पहल पर शहर में पहली बार “वन मेला–2026” का आयोजन किया जा रहा है। दो दिवसीय यह आयोजन 17 एवं 18 जनवरी को ऐतिहासिक सज्जनगढ़ परिसर में आयोजित होगा, जहां वन उत्पाद, जनजातीय परंपराएं और प्रकृति संरक्षण एक साथ देखने को मिलेंगे।

वन मेले का उद्देश्य उदयपुर संभाग की समृद्ध वन संपदा, दुर्लभ वनस्पतियों, जैविक उत्पादों और जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को आमजन के सामने प्रस्तुत करना है। यह मेला न केवल प्रदर्शनी बल्कि जागरूकता और आजीविका सृजन का मंच भी बनेगा।

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया विस्तार

संभागीय मुख्य वन संरक्षक सुनील चिद्री ने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान की भावना के अनुरूप तैयार किया गया है। मेले में स्थानीय वनों से प्राप्त औषधीय, जैविक एवं पूर्णतः ऑर्गेनिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। साथ ही वन उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां भी दी जाएंगी, जिससे स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

‘पंच गौरव’ अवधारणा के तहत संभागीय उत्पाद

मेले में उदयपुर संभाग के सभी जिलों से चयनित विशिष्ट उत्पादों को ‘पंच गौरव’ परिकल्पना के अंतर्गत प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी, विश्व प्रकृति निधि सहित विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों द्वारा तैयार किए गए पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

संरक्षण, संस्कृति और ज्ञान के विशेष स्टॉल

वन मेले में वन उत्पादों के साथ-साथ वन एवं वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तकें, जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी सामग्री तथा स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की विशेष स्टॉल लगाई जाएंगी। ये स्टॉल पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देंगी।

पर्यटन और संरक्षण का साझा मंच

“वन मेला–2026” को प्रकृति, परंपरा और प्रगति का संगम बताया जा रहा है। यह आयोजन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा, बल्कि उदयपुर आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी संभाग की जैव विविधता से परिचित कराएगा। संभागीय मुख्य वन संरक्षक ने नागरिकों, ग्रामीणों और पर्यटकों से मेले में भाग लेकर स्थानीय वन उत्पादों और जनजातीय ज्ञान को प्रोत्साहन देने की अपील की है।

Exit mobile version