24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। देश के कृषि अनुसंधान इतिहास में पहली बार किसी विश्वविद्यालय ने एक साथ तीन औषधीय फसलों की नई किस्में अधिसूचित करवाई हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एम.पी.यू.ए.टी.) ने ‘प्रताप’ नाम से विकसित किस्मों के जरिए हासिल की है। ‘प्रताप अश्वगंधा-1’, ‘प्रताप ईसबगोल-1’ और ‘प्रताप असालिया-1’ को हाल ही में नई दिल्ली में ICAR की केंद्रीय उपसमिति की बैठक में राजस्थान राज्य के लिए अधिसूचित किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी अद्वितीय है क्योंकि देश के किसी भी कृषि विश्वविद्यालय की यह पहली घटना है, जब एक ही अनुसंधान परियोजना से जुड़ी तीन किस्में एक साथ अधिसूचित हुई हों। इससे औषधीय फसलों की वैज्ञानिक खेती को संस्थागत आधार मिलेगा और किसानों को नई दिशा में उत्पादन व आय का बेहतर जरिया भी प्राप्त होगा।
औषधीय फसलों की ये किस्में विशेष क्यों हैं?
एम.पी.यू.ए.टी. के अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविंद वर्मा के अनुसार, ये तीनों औषधीय फसलें—ईसबगोल, अश्वगंधा और असालिया—राजस्थान में परंपरागत रूप से उगाई जाती रही हैं, लेकिन अब वैज्ञानिक पद्धति से विकसित किस्मों की अधिसूचना से किसानों को लाभदायक और रोग-प्रतिरोधी विकल्प उपलब्ध होंगे।
इस परियोजना के प्रभारी और प्रजनक डॉ. अमित दाधीच ने बताया कि—प्रताप ईसबगोल-1 की औसत बीज उपज 1207 किग्रा/हेक्टेयर है, जो 115 दिन में पकती है और कई रोगों के प्रति प्रतिरोधक है। यह आहार फाइबर के रूप में पाचन क्रिया, मोटापा, डिहाइड्रेशन और डायबिटीज जैसी समस्याओं के लिए उपयोगी है।
प्रताप अश्वगंधा-1, राजस्थान की पहली अधिसूचित किस्म है, जिसकी औसत सूखी जड़ उपज 421 किग्रा/हेक्टेयर है। यह तनाव, थकान, नींद और मानसिक शांति के लिए आयुर्वेद में उपयोगी प्रसिद्ध औषधीय पौधा है।
प्रताप असालिया-1 (आलिया) की औसत बीज उपज 2028 किग्रा/हेक्टेयर है और यह 111 दिन में परिपक्व होती है। रक्त की कमी, त्वचा रोगों, वात विकारों और नेत्र संबंधी बीमारियों के इलाज में सहायक यह फसल कम लागत, कम सिंचाई और कम संसाधनों में उगाई जा सकती है।
वैज्ञानिक नवाचार में MPUAT का अग्रणी कदम
कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने इसे विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि MPUAT सिर्फ अनुसंधान और प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी अग्रणी है। विश्वविद्यालय ने अब तक 54 पेटेंट, तीन बकरी नस्लें (सिरोही, गुजरी, करौली) और मक्का, मूंगफली व अफीम की उन्नत किस्में विकसित की हैं।
इन तीन औषधीय फसलों की अधिसूचना न केवल राज्य के किसानों को नई संभावनाएं देगी, बल्कि देशभर में औषधीय खेती की वैज्ञानिक और व्यावसायिक दिशा भी तय करेगी।
देश में पहली बार किसी कृषि विश्वविद्यालय ने एक साथ तीन औषधीय फसलों की किस्में अधिसूचित कर रचा कीर्तिमान, MPUAT की ‘प्रताप’ श्रृंखला से औषधीय क्रांति की हैट्रिक

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