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सांसद डॉ. रावत के सुझाव पर बनेगा जयसमंद का जोनल मास्टर प्लान, रुकेगा पलायन, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

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उदयपुर। डॉ. मन्नालाल रावत के सुझाव पर जयसमंद क्षेत्र के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को बजट घोषणा में शामिल कर लिया है। मास्टर प्लान के लागू होने से क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और बड़ी संख्या में हो रहा पलायन रुकने की उम्मीद है।

सांसद डॉ. रावत ने बजट से पूर्व दीया कुमारी, उप मुख्यमंत्री राजस्थान, को पत्र लिखकर जयसमंद वन्यजीव क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने से प्रभावित ग्रामीणों की आजीविका संरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आग्रह किया था कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से परामर्श कर एक समग्र पर्यटन मास्टर प्लान तैयार किया जाए।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 6 अगस्त 2020 के तहत जयसमंद वन्यजीव क्षेत्र (सलूम्बर जिला) को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। इसके बाद क्षेत्र में कई पर्यावरणीय प्रतिबंध लागू हुए, जिनका सीधा असर अनुसूचित क्षेत्र में बसे जनजातीय गांवों की आजीविका पर पड़ा। रोजगार के सीमित साधनों के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीणों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा था।

डॉ. रावत ने पत्र में तुलसी का नामला, नईझर, बगरूवा, अजबरा, बसोत, रूणिजा, वसु, अदवास, जगत, जावद, गींगला, नयाकुआ, मेन्दुडा, सेमाल, घुलजी का गुढ़ा, सराड़ी, कन्तोडा, बुटवास, पहाड़ी, बटुका, झाड़ोल, धानी मेलाना, धावड़िया, डिंगाड़ी फला, देवला और ओड़ा सहित अनेक गांवों का उल्लेख करते हुए स्थायी समाधान की मांग की थी।

सरकार ने इस पत्र पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए जयसमंद के लिए जोनल मास्टर प्लान बनाने का निर्णय लिया है। बजट में जयसमंद के साथ-साथ केसरबाग वन्यजीव अभ्यारण्य, तालछापर वन्यजीव अभ्यारण्य और शेरगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के लिए भी जोनल मास्टर प्लान तैयार करने की घोषणा की गई है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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