24 News Udpate भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में पशुपालन विभाग के एक डॉक्टर की छुट्टी मांगने पर नोडल अधिकारी द्वारा की गई असंवेदनशील टिप्पणी ने विभाग में आक्रोश की लहर फैला दी है। डॉक्टर ने जब वेंटिलेटर पर भर्ती अपने गंभीर रूप से बीमार पिता की देखभाल के लिए छुट्टी मांगी, तो वरिष्ठ अधिकारी ने सबूत के तौर पर वेंटिलेटर की फोटो भेजने को कह दिया।
घटना पशुपालन विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में सामने आई, जहां डॉ. मोहन फड़णवीस ने 5 अगस्त की रात करीब 1:58 बजे अपने पिता की गंभीर स्थिति के चलते छुट्टी का आवेदन डाला। उन्होंने लिखा, “मेरे पिता की तबीयत बहुत खराब है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। कृपया मुझे छुट्टी प्रदान की जाए।”
लेकिन 6 अगस्त की सुबह 9:19 बजे विभाग के नोडल प्रभारी डॉ. ओ.पी. बुनकर का जवाब आया, जिसमें उन्होंने लिखा, “कृपया अपने पिता के वेंटिलेटर पर होने की फोटो साझा करें।”
पिता के निधन के बाद डॉक्टर को मिली सांत्वना, पर सवाल भी
इसी ग्रुप में सुबह 9:41 बजे पशु चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. दिनेश खोईवाल ने सूचित किया कि डॉ. फड़णवीस के पिता का निधन हो गया है। इस सूचना के बाद कई चिकित्सकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और अधिकारी की टिप्पणी पर नाराज़गी जताई।
संगठन ने की माफी और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद पशु चिकित्सक संघ ने सख्त रुख अपनाते हुए डॉ. बुनकर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। जिलाध्यक्ष डॉ. खोईवाल ने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो संघ आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की गई है कि डॉ. बुनकर को भीलवाड़ा के नोडल प्रभारी पद से हटाया जाए।
डॉ. फड़णवीस बोले- “पूर्वाग्रह से किया गया व्यवहार”
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मोहन फड़णवीस ने कहा, “यह व्यवहार दुर्भावना और पूर्वाग्रह से प्रेरित था। मेरी निजी स्थिति का मज़ाक बनाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी मानसिकता की विभाग में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यूनियन जो निर्णय लेगी, मैं उसका समर्थन करूंगा।”
प्रशासन की चुप्पी, डॉक्टरों में रोष
फिलहाल विभागीय स्तर पर इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चिकित्सकों में भारी असंतोष व्याप्त है। सभी की एक ही मांग है— संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए, न कि संकट की घड़ी में सबूत मांगे जाएं।
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