24 News Update नाथद्वारा। मेवाड़ के प्रमुख तीर्थ श्रीनाथजी मंदिर में इस वर्ष होली दहन 3 मार्च, मंगलवार को सूर्योदय के समय वैदिक विधि-विधान के साथ किया जाएगा। चंद्र ग्रहण के कारण मंदिर के सेवा क्रम और दर्शनों के समय में विशेष परिवर्तन किया गया है। इस बार होली और डोल उत्सव दोनों आयोजन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन ही संपन्न होंगे।
सुबह 3 बजे शंखनाद से शुरू होगा डोल उत्सव
पुष्टिमार्ग की प्रधानपीठ के तिलकायत विशाल बावा के निर्देश पर मंदिर प्रशासन ने संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। इसके अनुसार 3 मार्च को सुबह 3 बजे शंखनाद के साथ डोल उत्सव की शुरुआत होगी। परंपरा के अनुसार डोल उत्सव सामान्यतः उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन इस बार पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण दिखाई देने के कारण शास्त्रीय नियमों के अनुसार तिथि को प्रधानता दी गई है। इसी आधार पर उत्सव पूर्णिमा तिथि में ही आयोजित किया जाएगा।
ग्रहण काल में भी खुले रहेंगे मंदिर के पट
मंदिर प्रशासन के अनुसार चंद्र ग्रहण का वेध प्रातः 3:52 बजे से प्रारंभ होगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे और मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा। इस अवधि में ग्रहण काल 3:20 से 6:48 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान भी मंदिर के पट खुले रहेंगे और श्रद्धालुओं को ग्रहण मोक्ष तक दर्शन कराए जाएंगे। इस दिन गोदान का समय शाम 5:04 बजे निर्धारित किया गया है।
कई प्रमुख दर्शनों का क्रम रहेगा बंद
सेवा व्यवस्था में बदलाव के तहत 3 मार्च को मंदिर में मंगला, श्रृंगार और ग्वाल दर्शन नहीं खुलेंगे। वहीं डोल उत्सव के तीसरे और चौथे राजभोग दर्शन सुबह 10:30 बजे कराए जाएंगे। इसके अलावा इस दिन उत्थापन, भोग, संध्या आरती और शयन दर्शन भी आयोजित नहीं किए जाएंगे। सूतक लगने के कारण राजभोग का सखड़ी प्रसाद गौशाला भेजा जाएगा, जबकि ग्रहण समाप्त होने के बाद शास्त्रीय विधान के अनुसार शेष सेवा क्रम पूरा किया जाएगा।

