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नयागांव–खेरवाड़ा के दिलीप डामोर की कला ने दिल्ली में बिखेरा जादू, इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी

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उदयपुर, 14 जनवरी 2026। अरावली की गोद, खेत–खलिहानों और ग्रामीण जीवन से निकले उदयपुर जिले के नयागांव–खेरवाड़ा निवासी युवा चित्रकार दिलीप डामोर ने राष्ट्रीय कला मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित भव्य कला प्रदर्शनी “द आर्ट ऑफ इंडिया” में दिलीप डामोर की कृतियों को स्थान मिला है, जो उनके कला–साधना के लंबे सफर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

यह प्रदर्शनी द टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के सहयोग से आयोजित की जा रही है। 10 जनवरी से 18 जनवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन 9 जनवरी को हुआ। प्रदर्शनी का केंद्रीय विषय “जादुई परिदृश्यों में रोमांच” रखा गया है, जिसमें देश की विविध सांस्कृतिक, प्राकृतिक और भावनात्मक अनुभूतियों को समकालीन कला के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय गरिमा के साथ उद्घाटन

उद्घाटन समारोह में कला जगत और कूटनीति से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। प्रदर्शनी की क्यूरेटर डॉ. अल्का पांडे, डिप्लोमैट संजय वर्मा, मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, भारत में नीदरलैंड की राजदूत (भारत, नेपाल व भूटान) महामहिम मारिसा गेरार्ड्स, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बोर्ड सदस्य व गैर-कार्यकारी निदेशक तनुज कपिलाश्रमी, तथा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के सीईओ (इंडिया एवं साउथ एशिया) पी.डी. सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय गरिमा प्रदान की।

‘प्रकृति ध्यान’ श्रृंखला में दिलीप की पहचान

इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के दृश्य कला विभाग के शोधार्थी दिलीप कुमार डामोर की “प्रकृति ध्यान (नेचर मेडिटेशन)” श्रृंखला की दो पेन ड्रॉइंग कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। सूक्ष्म रेखाओं और गहन भावबोध से रची गई ये कृतियां प्रकृति और ध्यान के आत्मिक संबंध को दर्शाती हैं। कला समीक्षकों के अनुसार, दिलीप की रचनाएं ग्रामीण परिवेश की सादगी को वैश्विक कला भाषा में रूपांतरित करती हैं।

गांव की मिट्टी से निकलकर इस स्तर तक पहुंचना दिलीप के लिए केवल सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की साधना, धैर्य और निरंतर अभ्यास का प्रतिफल है। यह उपलब्धि वागड़ अंचल और उदयपुर के युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।

उदयपुर के कलाकारों की सामूहिक छाप

प्रदर्शनी में उदयपुर से वरिष्ठ चित्रकार शैल चोयल, अब्बास बाटलीवाला और युवा कलाकार आर. (राकेश) विजयवर्गीय की “मून नाइट” शीर्षक से मिनिएचर कंटेम्पररी कृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं, जिससे मेवाड़ की कला परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।

दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी

इस प्रदर्शनी की खास बात यह भी है कि इसमें भारतीय आधुनिक कला के महान हस्ताक्षरों—एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रज़ा, के.जी. सुब्रमण्यम, जेमिनी राय, के. लक्ष्मा गौड़, जोगेन चौधरी सहित कई दिग्गज कलाकारों की कृतियां भी शामिल हैं। इससे प्रदर्शनी का कद और प्रभाव दोनों बढ़ गया है।

नीलामी और अगला पड़ाव

18 जनवरी तक इंडिया हैबिटेट सेंटर में चल रही इस प्रदर्शनी में चयनित कलाकृतियों की नीलामी भी की जा रही है। इसके बाद यह प्रदर्शनी राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर और फिर नेहरू आर्ट सेंटर, मुंबई में प्रदर्शित की जाएगी।

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