24 News Update जयपुर। राजस्थान में संगठन को मजबूती देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल करते हुए 37 जिला प्रभारियों और इतने ही सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन नियुक्तियों में 7 वर्तमान विधायक और 9 पूर्व विधायक भी शामिल हैं। सभी नियुक्त नेता अपने-अपने जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे और सीधे प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट देंगे।
सबसे अहम बात यह रही कि रोहित बोहरा को जयपुर शहर का प्रभारी फिर से बरकरार रखा गया है। वे पहले भी इसी जिम्मेदारी को संभाल रहे थे।
वहीं हाकम अली खान को चूरू, जगदीश चंद्र जांगिड़ को राजसमंद, शिमला देवी नायक को बीकानेर शहर और ग्रामीण, तथा अमित चाचाण को खैरथल-तिजारा का प्रभारी बनाया गया है।
इसी तरह प्रशांत शर्मा को टोंक और पूसाराम गोदारा को हनुमानगढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विधायक और पूर्व विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी
जिन 7 विधायकों को जिला प्रभारी बनाया गया है, उनमें रोहित बोहरा, प्रशांत शर्मा, शिमला देवी नायक, हाकम अली खान, पूसाराम गोदारा, जगदीश चंद्र जांगिड़ और अमित चाचाण शामिल हैं।
वहीं पूर्व विधायकों में चेतन डूडी, नसीम अख्तर इंसाफ, रमेश खंडेलवाल, प्रशांत बैरवा, जीआर खटाणा, मीनाक्षी चंद्रावत, हगामी लाल मेवाड़ा, राकेश पारीक और हीरालाल दरांगी को जिम्मेदारी दी गई है।
कई जिलों का एक साथ प्रभार
कांग्रेस ने इस बार कई नेताओं को एक साथ दो-दो जिलों का प्रभार सौंपा है। जयपुर ग्रामीण पूर्व-पश्चिम, सीकर-नीमकाथाना, अजमेर शहर-ग्रामीण, भीलवाड़ा शहर-ग्रामीण, नागौर-डीडवाना कुचामन, भरतपुर-डीग, बीकानेर शहर-ग्रामीण, बाड़मेर-बालोतरा, जैसलमेर-फलौदी, जोधपुर शहर-ग्रामीण, कोटा शहर-ग्रामीण, बांसवाड़ा-प्रतापगढ़ और उदयपुर शहर-ग्रामीण जैसे जिलों में यह व्यवस्था लागू की गई है।
उदयपुर संभाग की तस्वीर
उदयपुर संभाग में बांसवाड़ा-प्रतापगढ़ के लिए लाल सिंह झाला, चित्तौड़गढ़ के लिए हगामी लाल मेवाड़ा, डूंगरपुर के लिए हीरालाल दरांगी, राजसमंद के लिए जगदीश चंद्र जांगिड़ और उदयपुर शहर-ग्रामीण के लिए हरीश चौधरी को प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का मानना है कि इन नियुक्तियों से जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत होगा। प्रभारियों को जिलों में दौरे, कार्यकर्ताओं से संवाद और चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह फेरबदल ऐसे समय में हुआ है, जब प्रदेश में संगठन को फिर से सक्रिय करने और आगामी चुनावों की रणनीति को धार देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

