बाल विवाह करवाने पर होगी कानूनी कार्रवाई, बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मिले नए आयाम
24 News Update सलूंबर। राजस्थान में बाल विवाह की दर में लगातार गिरावट आ रही है। बीते तीन वर्षों में राज्य में लड़कियों के बाल विवाह में 66 प्रतिशत और लड़कों में 67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC) की रिपोर्ट ‘टिपिंग प्वॉइंट टू जीरो’ में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी और पारंपरिक मान्यताएं बाल विवाह के प्रमुख कारण हैं।
सलूंबर एवं उदयपुर जिलों में गायत्री सेवा संस्थान ने जिला प्रशासन, पंचायतों और समुदाय के सहयोग से 400 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। संस्थान द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष हेल्पलाइन चलाई जाती है तथा सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, ताकि समय पर कार्रवाई संभव हो सके।
यह जानकारी राजस्थान बाल आयोग सदस्य ध्रुव कुमार कविया ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह करवाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संस्थान निदेशक डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि संस्थान के प्रयासों से जिले में पहली निषेधाज्ञा जारी की गई है। वहीं, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा कि राजस्थान का मॉडल देशभर में बाल विवाह रोकथाम की दिशा में मिसाल बन रहा है।

