24 News Update उदयपुर। झीलों की नगरी में शनिवार को मानवता, करुणा और उम्मीदों का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहां संघर्षों से जूझते जीवन नए सपनों की डोर से जुड़ने को तैयार दिखे। नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में दो दिवसीय 45वें नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों के सामूहिक विवाह समारोह का शुभारंभ श्रद्धा, परंपरा और उल्लास के साथ हुआ। इस मानवीय उत्सव में 51 जोड़े सात फेरों के पवित्र बंधन में बंधेंगे, जिनमें 25 दिव्यांग और 26 सकलांग जोड़े शामिल हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए 700 से अधिक मेहमान इस अनूठे आयोजन के साक्षी बने।समारोह का शुभारंभ शुभ मुहूर्त में गणपति स्थापना और गणपति वंदन नृत्य “घर में पधारो गजानंद जी” के साथ हुआ। इसके बाद हल्दी और मेहंदी की पारंपरिक रस्मों ने पूरे परिसर को पीले रंग और मंगल भाव से सराबोर कर दिया।प्रातः 11:15 बजे सभी 51 जोड़े पीले परिधान में, पीले फूलों से सजे हाड़ा सभागार के मंच पर अपने निर्धारित स्थानों पर विराजमान हुए। संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल ने विशिष्ट अतिथियों के साथ गणपति स्थापना कर विवाह समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल के निर्देशन में अतिथियों ने जोड़ों को हल्दी और मेहंदी लगाने की रस्म निभाई। “आए है मेरी जिंदगी में बहार…”, “हल्दी लगाओ तेल चढ़ाओ री…”, “म्हारी मेहंदी को रंग…” और “श्याम नाम की मेहंदी…” जैसे गीतों की धुनों पर अतिथियों और परिजनों ने उत्साह के साथ ठुमके लगाए और पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया।समारोह में मुख्य अतिथि विजया कुमारी (दिल्ली), त्रिशाल शर्मा (दक्षिण अफ्रीका), महिराज (मॉरीशस) और प्रसन्न कुमार राउत (उड़ीसा) सहित सेवा मनीषियों का कैलाश ‘मानव’, प्रशांत अग्रवाल, जगदीश आर्य और देवेंद्र चौबीसा ने पगड़ी-उपरना और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।पहले दिन की शाम महिला संगीत और नृत्य संध्या के नाम रही। वैवाहिक गीतों की मधुर धुनों के बीच राधा-कृष्ण रास नृत्य, रुद्रावतार हनुमान, दुर्गा के नव स्वरूप और अयोध्यापति श्रीराम पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः 11:15 बजे सभी जोड़े वैदिक विधि-विधान के साथ पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में प्रवेश करेंगे। संस्थान की ओर से प्रत्येक जोड़े को गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सामग्री भी उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी। हर जोड़ा एक कहानी, हर कहानी एक प्रेरणाइस सामूहिक विवाह समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शामिल हर जोड़ा अपने साथ संघर्ष, साहस और उम्मीद की एक अलग कहानी लेकर आया है। किसी ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जीवन से हार नहीं मानी, तो किसी ने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों के बीच भी अपने सपनों को जिंदा रखा। यही वजह है कि यह आयोजन केवल विवाह की रस्म भर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश बन जाता है—कि जीवन की असली पहचान सीमाओं से नहीं, बल्कि हौसले से तय होती है। सेवा महातीर्थ में सजा यह पीला उत्सव दरअसल नए जीवन, आत्मविश्वास और मानवता के उजाले का उत्सव बन गया है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पंच गौरव योजना के तहत उदयपुर में तैराकी प्रतिभा खोज आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुरू ऑपरेशन त्रिनेत्र: 257 किलो से अधिक अवैध डोडाचूरा व अफीम के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, कार व उपकरण जब्त