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सांस्कृतिक समरसता का उत्सव: विद्यापीठ में दो दिवसीय पारंपरिक कला एवं नृत्य महोत्सव का आगाज

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24 news Update उदयपुर. जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ एवं अकादमी ऑफ वेलबीइंग समिति के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को दो दिवसीय पारंपरिक कला एवं नृत्य महोत्सव का शुभारंभ लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के वंदन और ख्यातनाम ओडिसी नृत्यांगना ज्योति श्रीवास्तव की विशेष प्रस्तुति से हुई। इसके बाद अतिथियों ने पूर्व डीआईजी प्रीता भार्गव द्वारा निर्मित पोस्टर का विमोचन किया।
कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं कलाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये कलाएँ संवेदनशीलता, अनुशासन, एकाग्रता और सांस्कृतिक चेतना को प्रबल करती हैं। नृत्य की लय, ताल और भावाभिव्यक्ति विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, सौंदर्य-बोध और व्यक्तित्व की गरिमा को सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कलाएँ मन में सहज आनंद, शांति और सकारात्मकता का संचार करती हैं, जिससे जीवन अधिक समन्वित और संतुलित बनता है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. हेमंत द्विवेदी ने कला-रूपों और उनके मानसिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। विद्यापीठ के कुल प्रमुख एवं कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर ने भारतीय समाज में कलाओं के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
आयोजन सचिव एवं प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग ने स्वागत उद्बोधन में परफॉर्मिंग आर्ट्स को सृजनात्मक अभिव्यक्ति बताते हुए इनके व्यापक प्रभाव और महत्त्व को साझा किया।
महोत्सव के प्रथम दिवस में पूर्व डीआईजी प्रीता भार्गव की ऑयल पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। इसके बाद ज्योति श्रीवास्तव और गुरु सिद्धार्थ किशोर की नाद प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ कलारिपयट्टू मार्शल आर्ट का प्रदर्शन भी हुआ, जिसे उपस्थित लोगों ने अत्यंत सराहा।
इस अवसर पर डॉ. अल्पना सिंह, डॉ. गायत्री तिवारी, डॉ. रचना राठौड़, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. भूरालाल श्रीमाली सहित शहर के प्रख्यात कलाकार, गणमान्य नागरिक, विद्यार्थी और संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया, जबकि आभार डॉ. वीनस व्यास ने व्यक्त किया।

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