जयपुर। राजस्थान के शांत माने जाने वाले कस्बों से निकलकर कम्बोडिया तक फैला यह नेटवर्क बीते वर्षों में भारत के सबसे खतरनाक साइबर अपराध मॉडलों में से एक बन चुका था।
फोन की एक घंटी, स्क्रीन पर दिखता फर्जी नोटिस और आवाज में कानून का डर—और फिर कुछ ही मिनटों में लोगों की जीवनभर की कमाई साफ।
लेकिन अब इस “डिजिटल आतंक” पर कोटपूतली-बहरोड़ जिला पुलिस ने ऐसा प्रहार किया है, जिसने चीनी साइबर गिरोहों के भारत-कम्बोडिया ऑपरेशन की परतें उधेड़ कर रख दी हैं।
15 थाने, 25 से ज्यादा टीमें और 100 से अधिक पुलिसकर्मी—एक साथ हुआ साइबर युद्ध
‘ऑपरेशन साइबर मुक्ति’ के तहत जिला पुलिस ने जिस पैमाने पर कार्रवाई की, वह राजस्थान ही नहीं, देश की बड़ी साइबर कार्रवाइयों में गिनी जाएगी।
एक साथ 15 थानों की 25+ टीमों ने बानसूर से लेकर कोटपूतली, बहरोड़ और खैरथल-तिजारा तक दर्जनों गांव-कस्बों में दबिश दी।
नतीजा—
- 41 संदिग्ध डिटेन
- 15 से गहन पूछताछ
- 25 आरोपी धारा 170 BNSS में गिरफ्तार
जांच में जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली है।
कम्बोडिया में बैठकर भारत को लूटा जा रहा था
पुलिस जांच के मुताबिक, कम्बोडिया में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर इस पूरे खेल का केंद्र थे।
इन कॉल सेंटरों को चीनी अपराधी संचालित कर रहे थे और वहां भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के 1000 से 1500 युवक काम कर रहे थे।
इन युवकों को:
- भारत से वियतनाम-थाईलैंड के रास्ते कम्बोडिया भेजा जाता
- पहले 15 दिन साइबर ठगी की ट्रेनिंग
- फिर कॉल सेंटर में तैनाती
- 1000 अमेरिकी डॉलर महीना वेतन + मोटा इंसेंटिव
अकेले बानसूर क्षेत्र से 50 से ज्यादा युवक इस नेटवर्क में फंसे, जबकि कुल संख्या सैकड़ों बताई जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट से फेक ट्रेडिंग तक—ठगी का पूरा हथियारखाना
इन कॉल सेंटरों से भारत में लोगों को निशाना बनाया जाता था—
- खुद को CBI, पुलिस, ED, कस्टम अधिकारी बताकर
- “आप डिजिटल अरेस्ट हैं” कहकर दहशत फैलाना
- फर्जी केस और गिरफ्तारी का डर दिखाना
- बैंक अकाउंट, OTP और डिजिटल वॉलेट खाली कराना
इतना ही नहीं—
- टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर विज्ञापन
- असली ऐप जैसे दिखने वाले फेक ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट
- शेयर मार्केट में मोटे मुनाफे का लालच
- और फिर लाखों-करोड़ों की ठगी
पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई।
रामनगर का ‘एजेंट’ निकला इंटरनेशनल साइबर रैकेट का मास्टरमाइंड
इस पूरे नेटवर्क का सबसे अहम चेहरा बना—
सुरेश सेन, निवासी रामनगर (बानसूर)।
पुलिस के मुताबिक:
- वही युवकों को विदेश भेजने का मुख्य दलाल था
- चीनी और कम्बोडियन अपराधियों से सीधा संपर्क
- पहले से लखनऊ साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज
सुरेश सेन को
प्रकरण संख्या 02/2026
धारा 316(2), 318(4), 351(2) BNS और
66-D IT एक्ट
के तहत गिरफ्तार किया गया है।
उच्च अधिकारियों की निगरानी में चला ऑपरेशन
यह कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, जयपुर रेंज—एच.जी.आर. सुहास के निर्देशन में चल रही विशेष मुहिम का हिस्सा है।
सूचना मिलते ही DIG-SP देवेन्द्र कुमार बिश्नोई ने साइबर सेल को खुली छूट दी।
नेतृत्व में रहे—
- एएसपी नाजिम अली
- RPS अधिकारी राजेंद्र बुरड़क और मेघा गोयल
- साइबर सेल प्रभारी संदीप कुमार यादव
जिनकी भूमिका को पुलिस ने “ऑपरेशन की रीढ़” बताया है।
अभी और बड़े खुलासों की तैयारी
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि:
- कम्बोडिया में इन कॉल सेंटरों को स्थानीय संरक्षण प्राप्त है
- ठगी की रकम अंतरराष्ट्रीय चैनलों से इधर-उधर की जाती है
अब पुलिस:
- विदेश भेजे गए युवकों की पहचान
- पूरे मनी-ट्रेल
- और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
की गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस की दो टूक चेतावनी
पुलिस ने युवाओं और परिजनों से साफ कहा है—
- विदेश नौकरी के नाम पर लालच में न आएं
- एजेंट, ऑफर लेटर और वीज़ा की पूरी जांच करें
- बिना लाइसेंस एजेंटों से दूरी रखें
- साइबर ठगी में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें
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