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भीलवाड़ा दंगा मामला: 6 आरोपियों को हाईकोर्ट से धारा 307 में राहत, अन्य धाराओं में केस जारी रहेगा

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24 news Update जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने भीलवाड़ा दंगा मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को धारा 307 (हत्या का प्रयास) के आरोप से राहत दी है। जस्टिस संदीप शाह ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि यह कोई पूर्व नियोजित हमला नहीं था, बल्कि अचानक हुई लड़ाई का नतीजा था और इसमें लगी चोटें भी साधारण प्रकृति की थीं।
यह घटना 29 अप्रैल 2022 की है। रात करीब 1:30 बजे शिकायतकर्ता मुस्ताक सिलावट ने सुभाष नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह भाई समीर और दोस्त आवेश के साथ बाइक पर जा रहा था, तभी उन्होंने देखा कि कुछ लोग मारपीट कर रहे थे। बीच-बचाव करने पर भीड़ ने उन्हें भी लाठियों और पत्थरों से हमला कर घायल कर दिया।
कोर्ट ने माना कि यह लड़ाई अचानक हुई थी और इसमें कोई पूर्व शत्रुता नहीं थी। पीड़ित पर कुल 9 चोटें थीं, जो सभी सिंपल इंजरी थीं। किसी तेजधार हथियार का प्रयोग नहीं हुआ। कई गवाहों ने स्पष्ट नहीं बताया कि हमला किसने किया। पुलिस द्वारा बरामद लाठी मात्र से आरोपियों को अपराध से जोड़ना पर्याप्त नहीं है।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 307 तभी लगती है जब हत्या का स्पष्ट इरादा या मौत का कारण बनने वाली चोट का सबूत हो। यहां आरोपियों का हत्या का इरादा साबित नहीं होता।
कोर्ट ने माना कि धारा 307 लागू नहीं होती, लेकिन अन्य धाराओं—धारा 143 (गैरकानूनी सभा), धारा 341 (गलत तरीके से रोकना), धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और धारा 336 (लापरवाही से जीवन को खतरे में डालना)—के तहत केस जारी रहेगा। अब यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भीलवाड़ा की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया है। सभी आरोपी 24 सितंबर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होंगे।
जिन 6 आरोपियों को धारा 307 से राहत दी गई है वे हैं जयशंकर शर्मा, शिवराज गुर्जर, राहुल बैरागी, मोनू सुथार, हिमांशु सेन और सत्तू माली। इनकी ओर से वकील रघुवीर सिंह चुंडावत ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील नरेंद्र गहलोत और ओपी चौधरी ने पैरवी की।

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