जयपुर/बाड़मेर। राजस्थान में जनगणना से ठीक पहले राज्य सरकार ने सीमावर्ती पश्चिमी राजस्थान के प्रशासनिक ढांचे में ऐसा बदलाव किया है, जिसका असर आने वाले कई वर्षों तक दिखाई देगा। बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए पुनर्गठन ने न केवल भौगोलिक नक्शा बदला है, बल्कि राजनीतिक भविष्य की दिशा भी तय कर दी है। 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना के तहत सरकार ने बायतू उपखंड को दोबारा बाड़मेर जिले से जोड़ दिया, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना जैसे बड़े उपखंडों को बालोतरा जिले में समाहित कर दिया गया। खास बात यह है कि यह फैसला उस समय लागू किया गया, जब अगले ही दिन से जनगणना के कारण प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज होनी थीं। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि मई 2027 तक सीमाओं में बदलाव पर रोक लगने के बाद यह पुनर्गठन अब व्यावहारिक रूप से अपरिवर्तनीय हो गया है। यही नहीं, आगामी विधानसभा सीटों का परिसीमन भी इसी नए ढांचे के आधार पर होगा, जिससे कई नेताओं की राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। फैसले के बाद जहां सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सुधारात्मक कदम’ बताया, वहीं विपक्ष ने इसे सत्ता हितों से प्रेरित बताते हुए जनभावनाओं के खिलाफ करार दिया है। सीमावर्ती इलाकों में अब यह बहस तेज हो गई है कि यह बदलाव प्रशासनिक सुविधा के लिए है या आने वाले चुनावी समीकरण साधने की तैयारी। स्पष्ट है कि बाड़मेर और बालोतरा का यह नया नक्शा केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में राजनीति, प्रशासन और प्रतिनिधित्व—तीनों को नई दिशा देगा। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation उदयपुर में श्रीमाली समाज को मिला संस्कारों का स्थायी केंद्र, रविवार को ‘श्री संस्कार भवन’ का भव्य लोकार्पण गुवाहाटी में रफ्तार का कहर, सड़क हादसे में अभिनेता आशीष विद्यार्थी दंपती घायल