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राजस्थान की 6,759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन अब इन पंचायतों के आम चुनाव जून से पहले नहीं होंगे। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश अतिरिक्त शपथपत्र में यह स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इसका नोटिफिकेशन मार्च महीने में जारी किया गया था। यह प्रक्रिया मई से जून तक चलेगी, और इसके बाद ही चुनाव की तिथियां तय की जाएंगी।
दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 243E और 243K तथा राजस्थान पंचायत राज अधिनियम, 1994 की धारा 17 के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, और इस अवधि की समाप्ति के तुरंत बाद चुनाव कराना अनिवार्य है। लेकिन सरकार ने 16 जनवरी 2025 को अधिसूचना जारी कर इन पंचायतों के चुनाव स्थगित कर दिए थे, जिसे लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने दलील दी कि चुनाव स्थगन का निर्णय संविधान और कानून का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि कानूनी रूप से जनप्रतिनिधि नहीं रहता और वह प्राइवेट व्यक्ति माना जाता है, इसलिए उसे प्रशासक नियुक्त करना असंवैधानिक है।
सरकार ने अपने बचाव में कहा कि उसने राजस्थान पंचायत राज अधिनियम की धारा 95 के तहत जिन पंचायतों में चुनाव नहीं हुए हैं, वहां प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है। साथ ही यह भी बताया कि कानून में यह कहीं नहीं लिखा कि प्रशासक कौन होगा, इसलिए सरकार ने निवर्तमान सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है। साथ ही हर पंचायत में उप सरपंच और वार्ड पंचों की एक प्रशासनिक समिति भी गठित की गई है, जो सरपंचों की सहायता करेगी।
यह मॉडल मध्य प्रदेश समेत कई भाजपा शासित राज्यों में पहले से अपनाया गया है, जहां निवर्तमान सरपंचों को प्रशासक नियुक्त कर पंचायतों का संचालन किया गया था।
सरकार ने यह भी बताया कि पुनर्गठन की प्रक्रिया के बाद राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर करीब 12,000 हो सकती है। वर्तमान में राज्य में कुल 11,194 ग्राम पंचायतें और 365 पंचायत समितियां हैं। पुनर्गठन के बाद करीब 800 नई ग्राम पंचायतें और लगभग 20 नई पंचायत समितियां बनने की संभावना है।
हाईकोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि वह इन पंचायतों के चुनाव कब तक कराएगी, क्योंकि पहले पेश किए गए जवाब में यह विवरण नहीं था। अदालत के निर्देशों के बाद सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया और बताया कि वन स्टेट वन इलेक्शन की नीति को अपनाने की दिशा में काम हो रहा है, इसलिए फिलहाल अलग-अलग चुनाव नहीं कराए जाएंगे।
जनवरी से लंबित इन पंचायतों के चुनाव को लेकर अब यह तय हो गया है कि जब तक पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक राज्य में ग्राम पंचायतों के चुनाव नहीं होंगे। इससे राज्य की 6,759 पंचायतों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जगह प्रशासक के माध्यम से कामकाज संचालित किया जाएगा।

