उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर ने गुरुवार रात लोक कला मंडल में संगीत को सिर्फ सुना नहीं, उसे जिया… महसूस किया… और अपने दिल की धड़कनों में बसा लिया। भारतीय लोक कला मंडल का प्रांगण उस वक्त गीतों भरे महासागर में तब्दील हो गया, जब मंच पर उतरीं अनुराधा पौडवाल—और उनके साथ उतर आईं यादें, मोहब्बत, मासूमियत और बीते दौर की अनगिनत ऐसी कहानियां जो दिलों पर छा गई। अमिट छाप छोड़ गई और यादों के भंवर में हर दर्शक, हर श्रोता को फंसा कर चली गईं शाम 7 बजे से पहले ही पंडाल खचाखच भर गया और उसके बाद शुरू हुआ गीतों भरा सफर। दर्शकों में गीतों के कद्रदान ऐसे भी थे कि कोई अपनी जवानी के बीते पलों को गीतों में ढूंढने आया था, तो कोई उन नगमों को सुनने, जिन्हें उसने सिर्फ किस्सों में सुना था। तो कोई बीते लम्हों की ऐसी कसक साथ लाया कि जिस पर गीतों की परछाई पड़ते ही पुराने घाव हरे हो गए। बीते लम्हात की यादों की दौलत आज फिर गीतों के नाम पर लुट गई। जैसे ही अनुराधा की आवाज़ पहली बार गूंजी—भीड़, मंच और समय… तीनों एक हो गए। स्व. श्रीमती इंदिरा मुर्डिया की 73वीं जयंती पर इंदिरा इंटरप्राइजेज, कश्ती फाउंडेशन और यूएसएम ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में सजी इस शाम का आगाज स्वागत से हुआ। इंदिरा इंटरप्राइजेज के डायरेक्टर डॉ. अजय मुर्डिया, नीतिज मुर्डिया, क्षितिज मुर्डिया, कश्ती फाउंडेशन की संस्थापक श्रद्धा मुर्डिया, आस्था मुर्डिया और यूएसएम के डॉ. एच.एस. भुई ने अतिथियों और शहरवासियों का अभिनंदन किया। फिर शुरू हुआ वो सफर, जहां जिसमें हर नगमा एक रूमानी अहसास बनकर सिर पर चढकर बोलने लग गया। ‘तम्मा-तम्मा लोगे’ की पहली बीट के साथ ही दर्शकों के हाथ हवा में और कदम जमी से आसमान तक थिरकते हुए नजर आने लगे। जैसे ही ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ की धुन छिड़ी, पूरा माहौल मीठी मोहब्बत की चाशनी में डूब कर गुलाब जामुन हो गया। मिठास ऐसी कि नजरों ने नजारों में अपनों व अपने बीते पलों को ढूंढ लिया। ‘नज़र के सामने जिगर के पास’ ने दिलों की धड़कनों को एक ही लय में बांध दिया, दिलों की तुरपाई हो गई, दिलों की आहों को गीत का जरिया मिल गया। ‘अदाएं भी हैं’ ने मुस्कुराहटों को और गहरा और फरेबी कर दिया। मंच और दर्शकों के बीच गीतों भरे इस संवाद में कोई भी तैर नहीं रहा था, बस डूबे जा रहा था। इस बीच जब थोड़ी देर के लिए सुर थमे, तो मंच पर सम्मान का दौर शुरू हुआ। इंदिरा इंटरप्राइजेज और विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘इंदिरा मुर्डिया लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से वरिष्ठ जननेता दीपक वोराजी को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ 5 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की गई—और तालियों की गूंज ने इस पल को और भव्य बना दिया। लेकिन असली जादू फिर शुरू हुआ। पंडाल में अनुराधा फिर मंच पर आईं और ‘एक प्यार का नगमा है’—जैसे ही ये शब्द हवा में तैरे, पूरा पंडाल एक साथ गाने लगा। कॉन्सर्ट जैसा दृश्य उपस्थित हो गया। ये समा, समा है ये प्यार का, किसी के इंतजार का, दिल ना चुरा ले कहीं मेरा मौसम बहार का,,,ने पुरानी यादों के दरवाजे खोल दिए नश्तर ऐसी चुभोए कि घायल हुए बिना वो भी ना रहे जो खुद को पत्थर के सनम समझ बैठे थे। इसके बाद ‘रहे ना रहे हम’ ने आंखों में नमी ला दी और कार्यक्रम के अहसास को गहराई तक दिलों में समाहित कर दिया।और फिर… ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’—इस गीत ने संगीत प्रेमियों के अहसास को नई उंचाइयों तक पहुंचा दिया। तालियों की गड़गड़ाहट, सीटियों की आवाज़ और गूंजते सुर… लोक कला मंडल देर तक ऐसे ही उसी एहसास में डूबा रहा।‘सांसों की जरूरत है’ की बारी आई तो इस संगीत यात्रा ने अपने चरम को छू लिया। सुनने वालों को लगा जैसे संगीत की सांसें आत्मा तक घुल आईं हैं। खुशनुमा चेहरे चमक उठे और गाने लगे—बस इक सनम चाहिए, आशिकी के लिए। सुनने से ज्याद महसूस करने वाला अहसास, और अहसास के साथ निकलते अश्क। किसी ने किसी के लिए बहाए तो किसी ने खुद अपने लिए संजो लिए। कार्यक्रम की सफलता के पीछे कश्ती फाउंडेशन के कपिल पालीवाल, डॉ. चित्रसेन, कुनाल मेहता और यूएसएम की उर्वशी सिंघवी, लता भंडारी, संजय वर्मा, डॉ. सीमा सिंह, विपिन कावड़िया, उमेश मनवानी, टिंकू छाबड़ा और अभय बांठिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।आयोजकों ने इस बार वेले पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं से कार्यक्रम को रॉयल बनाने का प्रयास किया। शाम खत्म हुई… लेकिन सुर नहीं। लोग लौटे… लेकिन गीत गूंजते ही रहे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राजस्थानी गीतों की गूंज में सजी संस्कृति, जैन समाज की महिलाओं ने बिखेरा रंग प्रशिक्षण में मिला परिवर्तन का मंत्र, भाजपा महाअभियान भविष्य के रणनीतिकारों को तराशा