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अपनत्व का अहसास: राजस्थान पुलिस का ‘वरिष्ठ जन सम्बल (Seniors Not Alone)” अभियान

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24 News Update जयपुर 09 मई। उम्र के उस पड़ाव पर जहाँ अपनों का साथ सबसे बड़ी ताकत होती है, वहाँ अजमेर पुलिस एक ‘बेटे’ और ‘संबल’ की भूमिका निभा रही है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार और जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला के निर्देशन में संचालित “वरिष्ठ जन सम्बल कार्यक्रम (Seniors Not Alone)” ने पुलिस के मानवीय चेहरे को एक नई पहचान दी है।
वृत दक्षिण के वृताधिकारी मनीष बड़गूजर के सुपरविजन में पुलिस की टीमें केवल थानों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के घर की चौखट तक पहुँच बनाई। अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों को सुरक्षा का अहसास कराना है जो अकेले रहते हैं या असहाय हैं। पुलिस अधिकारियों और बीट प्रहरियों ने घर-घर जाकर न केवल उनका हाल-चाल जाना, बल्कि उनकी उन छोटी-मोटी समस्याओं को भी सुना जिन्हें अक्सर समाज अनदेखा कर देता है।
सुरक्षा का त्रि-स्तरीय कवच
वृत दक्षिण के विभिन्न थानों आदर्शनगर, अलवरगेट, क्लॉक टावर और रामगंज द्वारा की गई कार्यवाही में तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  1. पंजीकरण और डेटा: अकेले रहने वाले बुजुर्गों और वृद्ध दंपत्तियों का विस्तृत डेटा तैयार किया गया ताकि आपात स्थिति में उन तक तुरंत पहुँचा जा सके।
  2. जागरूकता का मंत्र: डिजिटल युग में बुजुर्ग सबसे आसान शिकार होते हैं। पुलिस ने उन्हें साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी और अज्ञात व्यक्तियों से सावधानी बरतने के व्यावहारिक तरीके सिखाए।
  3. हेल्पलाइन की शक्ति: प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को आपातकालीन नंबरों की जानकारी दी गई और उन्हें विश्वास दिलाया गया कि पुलिस केवल एक कॉल की दूरी पर है।
    थानों की सक्रियता और सामुदायिक जुड़ाव
    ~ आदर्शनगर व क्लॉक टावर थाना क्षेत्र में बीट अधिकारियों ने व्यक्तिगत संवाद के जरिएब कम्युनिटी पुलिसिंग को मजबूत किया। बुजुर्गों के मन से पुलिस का डर निकालकर मित्र पुलिस की छवि स्थापित की गई।
    ~ अलवरगेट व रामगंज थाना क्षेत्रों में महिला वरिष्ठ नागरिकों और वृद्ध दंपत्तियों से विशेष संवाद किया गया। बाजार और मोहल्लों में संपर्क कर उनकी सुरक्षा आवश्यकताओं का धरातलीय आकलन किया गया।
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