24 News Update जयपुर। बेरोजगारों की कहीं सुनवाई नहीं होती है, उन्हें हर कदम पर अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है फिर चाहे जो एजेंसी हो, वो परीक्षा से पहले परीक्षा लेने में कोई कसर नहीं छोड़ती। ढाई महीने हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित रहा, आया तो सुप्रीम कोर्ट चले गए। वहां से फैसला आया कि फार्म भरवाओ, एग्जाम में बिठाओ। तो आरपीएससी फिर सुप्रीम कोर्ट चली गई।राजस्थान की SI भर्ती-2025 अब परीक्षा कम और कानूनी शतरंज की बाजी ज्यादा बनती जा रही है। परीक्षा से ठीक पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में आपात प्रार्थना पत्र दाखिल कर उस आदेश पर ब्रेक लगाने की कोशिश की है, जिसने भर्ती प्रक्रिया को अचानक विस्तार दे दिया। परीक्षा तारीख: 5-6 अप्रैल है। समय बचा है सिर्फ 2 दिन का। क्या है पूरा विवाद?सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 2021 की SI भर्ती में शामिल रहे अभ्यर्थियों को राहत देते हुए आदेश दिया कि वे भी 5-6 अप्रैल को होने वाली 2025 भर्ती परीक्षा में बैठ सकेंगे। ये वे अभ्यर्थी हैं जो अब आयु सीमा पार कर चुके हैं और इसलिए आवेदन नहीं कर पाए थे। कोर्ट का मकसद साफ था—पुरानी भर्ती में हुई गड़बड़ियों का नुकसान नए मौके में न झेलना पड़े। RPSC का पलटवार: “यह आदेश व्यवहारिक नहीं”आयोग ने अब कोर्ट में कहा है— करीब 2.21 लाख अतिरिक्त अभ्यर्थी अचानक जोड़ना संभव नहीं है। पहले ही 7.5 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड जारी हो चुके, परीक्षा केंद्र, स्टाफ और व्यवस्थाएं पूरी तरह तय हैं। सबसे बड़ा तर्क—“हमें सुने बिना आदेश दे दिया गया”। यानी आयोग ने सीधे तौर पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का हवाला दिया है। मगर छात्रों के प्राकृतिक न्याय का क्या होगा?? उनकी कौन सुनेगा?? कानूनी मोड़: आदेश सीमित करने की मांगRPSC ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि— आदेश को सभी 2021 अभ्यर्थियों पर लागू न किया जाए। इसे सिर्फ याचिकाकर्ताओं या कोर्ट पहुंचे उम्मीदवारों (जैसे सूरजमल मीणा) तक सीमित रखा जाए। इस याचिका पर सुनवाई आज छुट्टी के दिन जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच करेगी। जड़ में पुराना जख्म—SI भर्ती 2021यह पूरा विवाद 2021 भर्ती की गड़बड़ियों से निकला— राजस्थान हाईकोर्ट ने पेपर लीक के चलते भर्ती रद्द की, साथ ही अगली भर्ती में आयु सीमा में छूट देने की सिफारिश, लेकिन खंडपीठ ने इस फैसले पर स्टे लगा दिया। इसके बाद RPSC ने छूट नहीं दी, और मामला कोर्ट-कचहरी में उलझता चला गया जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया— लेकिन ढाई महीने बाद भी फैसला नहीं आया, और यही देरी अब पूरे संकट की जड़ बन गई। दांव पर: लाखों अभ्यर्थियों का भविष्यअब सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि व्यवस्था बचाई जाए या समान अवसर दें। यह मामला अब भर्ती नहीं, बल्कि कानून बनाम सिस्टम की सीधी भिड़ंत है। एक तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो पुराने विवाद का खामियाजा भुगत रहे हैं, दूसरी तरफ एक ऐसा सिस्टम है जो आखिरी वक्त में बदलाव झेलने को तैयार नहीं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation मौत के मुहाने से लौटाई जिंदगी: अजमेर पुलिस बनी ‘जीवनरक्षक’, आनासागर में डूबते बुजुर्ग को बचाया महज 1 घंटे में 7 साल के मासूम को मिलाया परिवार से, अजमेर पुलिस की हर तरफ तारीफ