24 News Update टोक्यो/मॉस्को/होनोलूलू | रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप बुधवार सुबह 8.8 तीव्रता के भीषण भूकंप से दहल उठा। भारतीय समयानुसार सुबह 4:54 बजे आए इस भूकंप ने न केवल रूस, बल्कि प्रशांत महासागर के तटीय देशों में भी भयावह असर डाला। धरती के कंपन के साथ ही समुद्र में ऊँचाई तक उठीं सुनामी लहरों ने वैश्विक स्तर पर आपदा की चेतावनी फैला दी।
भूकंप का केंद्र ज़मीन से 19.3 किलोमीटर नीचे बताया गया, और इसके झटके पूरे कामचटका क्षेत्र में तीव्रता से महसूस किए गए। सेवेरो-कुरीलस्क शहर और आसपास के तटीय क्षेत्रों में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, सड़कें फट गईं और बिजली सप्लाई बाधित हो गई। भूकंप के बाद समुद्र से 3 से 4 मीटर ऊंची सुनामी लहरें उठीं, जिनसे कई बंदरगाह, मछली पकड़ने के केंद्र और तटीय रिहायशी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कामचटका प्रशासन ने भूकंप के तुरंत बाद तटवर्ती नागरिकों को ऊँचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का अभियान चलाया। आपात राहत दल सक्रिय कर दिए गए हैं और हेलिकॉप्टरों के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है।
जापान में भी इस भूकंप के चलते बड़ा असर देखने को मिला। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया और होक्काइडो से लेकर चिबा तक 21 प्रान्तों में 20 लाख से अधिक लोगों को तटीय इलाकों से हटाया गया। जापान के टोक्यो, योकोहामा, और ओसाका शहरों में हाई-स्पीड ट्रेनें रोकी गईं और कई बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही स्थगित कर दी गई। हालांकि जापान में सुनामी की लहरें अपेक्षाकृत कम रही — लगभग 30 से 50 सेमी — लेकिन एहतियात के तौर पर कई हवाईअड्डे जैसे सेंडाई और नाहा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि आने वाले 24 घंटे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
उधर अमेरिका के हवाई द्वीप समूह में भी सुनामी की आशंका के चलते आपातकाल घोषित कर दिया गया है। हवाई के गवर्नर जोश ग्रीन ने नागरिकों से समुद्र से दूर ऊंचे इलाकों में जाने की अपील की है। कैलिफोर्निया के सैन डिएगो, लॉस एंजेलिस और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों में भी बंदरगाह खाली कराए गए हैं और समुद्र से सटी गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय भूगर्भीय एजेंसियों के अनुसार, यह भूकंप अब तक दर्ज किए गए छठे सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल किया गया है। इससे पहले 1952 में इसी कामचटका क्षेत्र में 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे हवाई द्वीप में तबाही हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “मेगाथ्रस्ट” श्रेणी का भूकंप हो सकता है, जिसका असर आने वाले दिनों तक आफ्टरशॉक्स और समुद्री गतिविधियों में बना रह सकता है।
भूकंप और सुनामी का यह सिलसिला न केवल मानव जीवन, बल्कि समुद्री जैवविविधता के लिए भी खतरा बन चुका है। जापान के होंशू द्वीप के तट पर भूकंप से ठीक पहले कई मृत व्हेल देखी गईं, जिसे विशेषज्ञ संभावित प्राकृतिक संकेत मान रहे हैं। समुद्र में फैलते कंपन के कारण मछलियों के झुंडों में असामान्य हलचल और दिशा परिवर्तन देखे जा रहे हैं। अब तक जानमाल की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संपत्ति और बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। रूस, जापान, अमेरिका और अन्य प्रशांत तटीय देश इस आपदा से निपटने के लिए एकजुट होकर प्रयासरत हैं। इस भूकंप ने एक बार फिर पृथ्वी की भूगर्भीय अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं की अकल्पनीय शक्ति को दर्शा दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भूकंप के झटके और सुनामी लहरों की पुनरावृत्ति की आशंका बनी हुई है, ऐसे में सभी देशों को 48 घंटे तक विशेष सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी गई है।
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