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जैन दिवाकर के विचारों से संगठन गढ़ने का आह्वान: राष्ट्रीय अधिवेशन में युवा शक्ति को नई दिशा

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24 News Update उदयपुर। जैन समाज के युवा संगठन को नई ऊर्जा और दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति युवा शाखा के राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन सत्र उदयपुर में उत्साह और वैचारिक गंभीरता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में धर्म, संगठन और युवा शक्ति के समन्वय पर गहन मंथन हुआ।
मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री गौतम दक ने कहा कि जैन समाज की पहचान केवल आयोजनों और स्वागत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संगठन को जैन आचार-विचारों के आधार पर मजबूत करना होगा। उन्होंने चेताया कि समाज में बढ़ती कुछ कुरीतियों और भौतिक आकर्षणों पर अंकुश लगाने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने कहा—“हमारे तीर्थंकरों और संतों ने जो विरासत दी है, उसकी रक्षा और विस्तार ही हमारा कर्तव्य है।”

युवाओं में धर्म के प्रति घटता रुझान चिंता का विषय
सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक प्रसन्न कुमार खमेसरा ने युवाओं के धर्म से दूर होते रुझान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में मंदिर, साधु-संतों और धार्मिक मूल्यों से दूरी बढ़ रही है, जिसे समय रहते सुधारना होगा।
“जीवन में किसी न किसी सकारात्मक लगाव की आवश्यकता है, और धर्म से बेहतर आधार कोई नहीं हो सकता,” उन्होंने कहा।

“पद नहीं, कद बढ़ाने के लिए काम करें”
संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आई. एम. सेठिया ने युवाओं को आत्मविकास का मंत्र देते हुए कहा कि सफलता के लिए व्यक्तित्व निर्माण और आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा—“आप पद के लिए नहीं, अपने कद को बढ़ाने के लिए काम करें।”

‘दिवाकर रत्न’ से सम्मानित हुए केशरीमल संघवी
अधिवेशन में जैन दिवाकर सम्प्रदाय के वरिष्ठ श्रावक केशरीमल संघवी को “दिवाकर रत्न” सम्मान से अलंकृत किया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि जिन वरिष्ठ श्रावकों ने पूज्य गुरुदेव के प्रत्यक्ष दर्शन किए हैं, उनका घर-घर जाकर सम्मान किया जाएगा।

महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित
युवा महामंत्री कमलेश दुग्गड द्वारा रखे गए कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए, जिनमें प्रमुख हैं— देशभर में जैन दिवाकर परिवारों को जोड़ने का अभियान शुक्ल पक्ष की तेरस को गुरु चालीसा/नवकार मंत्र का सामूहिक जाप
जैन दिवाकर जी की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय स्तर पर “गौरव यात्रा” डाक टिकट, स्मारक सिक्के जारी करने और एक ट्रेन का नाम “जैन दिवाकर एक्सप्रेस” रखने का प्रस्ताव

संगठन, समाज और संस्कार का संगम
अधिवेशन में रमेशचंद मेहता ने युवा शाखा की भावी योजनाओं की जानकारी दी, जबकि अन्य वक्ताओं ने जैन दिवाकर जी के आदर्शों को जीवन में उतारते हुए समाज सेवा का आह्वान किया। देशभर के 37 जिलों से आए सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं और गुरुभक्तों की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गौतम मुनि ने मंगल पाठ के साथ सभी को गुरु समर्पण और संगठन एकता का संदेश दिया।

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