उदयपुर, 15 मार्च। नारायण सेवा संस्थान द्वारा सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा में आयोजित दो दिवसीय 45वां दिव्यांग एवं निर्धन नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह रविवार को सामाजिक समरसता, समान अवसर और मानवीय संवेदना के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 51 दिव्यांग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और पवित्र अग्नि की साक्षी में सात फेरे लेकर दाम्पत्य जीवन की नई यात्रा शुरू की। इन जोड़ों में विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से जूझ रहे युवक-युवतियां शामिल थे—कोई पैरों से दिव्यांग, कोई एक हाथ या एक पैर से, कोई दृष्टिबाधित तो कुछ सहारे के साथ चलने वाले। जीवन की कठिन परिस्थितियों से गुजरने वाले ये सभी जोड़े अब एक-दूसरे का सहारा बनकर भविष्य की नई राह पर आगे बढ़ेंगे। संस्थान से मिली नई पहचानउल्लेखनीय है कि अधिकांश जोड़ों ने संस्थान में ही नि:शुल्क सुधारात्मक सर्जरी, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और पुनर्वास सेवाएं प्राप्त कीं। साथ ही सिलाई, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर और अन्य कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाए। कई जोड़ों की जीवनसाथी की तलाश भी संस्थान के माध्यम से ही पूरी हुई। सामूहिक विवाह में शामिल 51 जोड़ों में 25 दिव्यांग तथा 26 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। संघर्ष और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानियांउदयपुर के खेमपुरा निवासी मधु भोई बाएं पैर से दिव्यांग हैं और ब्यूटी पार्लर में कार्य कर परिवार का सहारा बनी हुई हैं। उनके जीवनसाथी बने इंदौर जिले के नौलाना गांव निवासी संतोष लोढ़ा, जो छह माह की उम्र में लकवे से प्रभावित हुए थे और वर्तमान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। दोनों का परिचय एक कार्यक्रम में हुआ और मोबाइल पर संवाद के बाद यह रिश्ता विवाह तक पहुंचा। इसी तरह मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी राजेश जन्मजात पैरों की विकृति के बावजूद ई-मित्र केंद्र संचालित कर आत्मनिर्भर हैं। उनकी जीवनसंगिनी बनीं भिंड जिले के बरौना गांव की राजकुमारी, जो मूकबधिर हैं। दोनों का परिचय एक सामाजिक कार्यक्रम में हुआ और धीरे-धीरे यह रिश्ता विवाह बंधन में बदल गया। परंपरा और उल्लास के बीच विवाह संस्कारसुबह 10 बजे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच 51 जोड़ों का स्वागत किया गया। भगवान श्रीनाथ जी की छवि के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ तोरण की रस्म सम्पन्न हुई। दोपहर 12:15 बजे पुष्पों से सुसज्जित मंच पर नवदंपत्तियों ने संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ और कमला देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल की उपस्थिति में वर-वधू ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। इसके बाद 51 वेदियों पर 51 आचार्यों ने वैदिक विधि से सात फेरे सम्पन्न कराए। देश-विदेश से आए दानदाता, सामाजिक कार्यकर्ता और परिजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। नई गृहस्थी के लिए उपहारप्रत्येक नवदंपति को नई गृहस्थी शुरू करने के लिए पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट, पंखा, दीवार घड़ी सहित आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। कन्यादानियों और अतिथियों ने मंगलसूत्र, चूड़ियां, चैन, कर्णफूल, बिछिया, पायल और अन्य सामग्री भी भेंट की। सांस्कृतिक कार्यक्रम और भावुक विदाईसमारोह में शिव-पार्वती और कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने सांस्कृतिक वातावरण को और भी आकर्षक बना दिया। विवाह के बाद नववधुओं की प्रतीकात्मक डोली विदाई के दौरान माहौल भावुक हो उठा। संस्थान परिवार ने नवदंपतियों को उनके गृह नगरों तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था भी की। सेवा से ही बनेगा समरस समाजसंस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान का उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर देना है। जब समाज सेवा और संवेदना के साथ आगे बढ़ता है, तभी समरस और सशक्त भारत का निर्माण संभव होता है। इस अवसर पर दर्शना मेहता, यश मेहता, ओम प्रकाश सोनी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, दानदाता और अतिथि उपस्थित रहे। संस्थान में अब तक 2510 दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों का विवाह सम्पन्न कराया जा चुका है और अधिकांश परिवार आज सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation गोगुंदा में भाजपा का दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग शुरू, रावलिया में कार्यकर्ताओं को वैचारिक व संगठनात्मक प्रशिक्षण महाराणा प्रताप खेलगांव तरणताल में तैराकों का आवासीय प्रशिक्षण शिविर जारी