24 न्यूज अपडेट. भीलवाड़ा। मांडल कस्बे में 47 साल से बंद एक धार्मिक स्थल को लेकर विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे “4 फरवरी को मांडल चलो“ अभियान के चलते माहौल गर्म है। इस पर मांडल के विधायक उदयलाल भड़ाना ने युवाओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार के चक्कर में न आएं और मांडल न पहुंचें। धार्मिक स्थल का इतिहास देखें तो पता चलात है कि यह विवाद लगभग 47 साल पुराना है। 1977 में एक समुदाय ने चबूतरे पर धार्मिक आयोजन की अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने इस स्थल पर कब्जा कर लिया और इसे अपना धार्मिक स्थल घोषित कर दिया। मामला अदालत में पहुंचा, जिसने ताला लगाकर चाबी मांडल थाने में जमा करा दी। अभी यह पुलिस निगरानी में है।
इस बारे में विधायक भड़ाना, जो संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि वे इस स्थल को संवैधानिक और कानूनी दायरे में खुलवाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और प्रचार के झांसे में न आएं, क्योंकि इससे उनकी भावनाओं और भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है। आपको बता दें कि 2022 का मामला है जिसमें गोपाल नामक युवक ने इस स्थल का ताला तोड़ दिया था और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था। इस पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई और पुलिस ने गोपाल को गिरफ्तार कर लिया। पिछले साल भगवान देवनारायण की जयंती पर इस स्थल के पास एक धार्मिक कार्यक्रम हुआ था, जिसके बाद से ही विवाद ने फिर जोर पकड़ा। प्रतीक सेना के अध्यक्ष गोपाल सिंह बस्सी ने कहा कि 4 फरवरी को माही सप्तमी के अवसर पर वे धार्मिक स्थल में पूजा करना चाहते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करने की बात कही है। धार्मिक स्थल से जुड़े इस विवाद को लेकर प्रशासन, राजनीतिक नेता और संगठनों के बीच मतभेद साफ झलक रहे हैं। विधायक ने इसे शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से सुलझाने की बात कही है, जबकि सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार ने तनाव बढ़ा दिया है। प्रशासन के लिए इस मुद्दे को संभालना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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