उदयपुर। महाराणा भूपाल चिकित्सालय के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती मरीज के पिता से खून के नाम पर दिन दहाड़े 10 हजार की लूट हो गई। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। गुलाबनगर, खेरोदा के किसान कमलेश मेघवाल ने बताया कि उनका बेटा कृष्णा एक्सीडेंट के कारण ट्रॉमा वार्ड में भर्ती था। वह सुखाड़िया विश्वविद्यालय में पढ़ता है। गत दिनों बाइक को कार ने टक्कर मार दी थी। आज बुधवार को सुबह इलाज के दौरान वार्ड में एक व्यक्ति आया। उसने लड़के के पिता को बुलाया और ‘ब्लड उपलब्ध कराने’ की बात कही। सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर आया यह आदमी वार्ड से कुछ पेपर बनाने व बात करने के बहाने पिता को पैदल ही ब्लड बैंक तक ले आया।
उसने बच्चे के बारे में कुछ नहीं पूछा और कहा कि मेरे साथ चलो। पिता ने कहा कि मैंने उसके पीछे चलकर ब्लड बैंक ले जाया और वह ऊपर ले गया। उसके बाद नीचे लाया। ब्लड बैंक के अंदर नहीं गया। इसके बाद सीढ़ियों में लेकर गया। यहां पर तीन यूनिट अर्जेंट ब्लड की जरूरत बताई व कहा कि जल्दी व्यवस्था करो नहीं तो बच्चे की जान को खतरा है। इसके बाद घबराए हुए पिता ने हैरान परेशान होकर जेब से 10 हजार रुपये निकाल कर बदमाश को दे दिए। बदमाश की यह करतूत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। उसका चेहरा भी साफ दिखाई दे रहा है। इसके बाद पिता को टरकाने के लिए उसने आधार कार्ड मांगा। जब पिता ने कहा कि मैं लाकर देता हूं तो उसने कहा मैं यहीं हूं, आ जाओ। इसके बाद जब वह वापस लौटे तो बदमाश मौके से चंपत हो गया।
वास्तव में खून की कोई जरूरत ही नहीं थी
कमलेश मेघवाल खेती-बाड़ी करते हैं और उनका परिवार छोटे पैमाने पर जीवन यापन करता है। उन्होंने बताया कि वास्तव में खून की जरूरत ही नहीं थी। ब्लड बैंक में पता किया तो बताया कि बच्चे को खून की आवश्यकता बताई ही नहीं गई है। इसके बाद हाथीपोल थाने में मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस ने सीसीटीवी के आधार पर जांच तेज कर दी है। आरोपी के भी शीघ्र ही पकड़े जाने की उम्मीद है।
आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक महिला गार्ड और उसके सहयोगी पर सज्जनगढ़ (बांसवाड़ा) में रक्त दिलाने के नाम पर मरीज के पति से वसूली का आरोप लगा था। मामले में भी अस्पताल प्रशासन ने बड़ी सफाई से इसे मैनेज किया, लेकिन दोषियों पर आज तक न तो कोई जांच हुई और न कोई सजा मिली। एमबी अस्पताल परिसर में ऐसे अवैध तत्वों का बेखौफ घूमना और प्रशासन की मौन निगरानी सवाल खड़ा करती है कि क्या वास्तव में मरीजों की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है या गरीबों की जेब इलाज का स्थायी साधन बन गई है।
पीड़ित परिवार ने दर्ज करवाई शिकायत
पीड़ित परिवार ने हाथीपोल थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। ट्रॉमा वार्ड की सीढ़ियों और वार्ड परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज में पैसे देते हुए व्यक्ति दिखाई दे रहा है। जांच अधिकारी श्री मांगीलाल को रिपोर्ट सौंप दी गई है। अस्पताल प्रशासन और पुलिस के लिए यह गंभीर चेतावनी है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाओं से न सिर्फ मरीज प्रभावित होंगे, बल्कि सार्वजनिक विश्वास भी कमजोर होगा।
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