उदयपुर। आज शेयर मार्केट में बल्ले-बल्ले हो गया। 381 अंकों की उछाल के साथ 75124 के ऐतिहासिक स्तर पर खुला। इतिहास रचने में निफ्टी भी पीछे नहीं रहा। निफ्टी 98 अंकों की बढ़त के साथ आज खुला। नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा की धूम के बीच नवरात्र के पहले दिन शेयर मार्केट में भी बूम है। सेंसेक्स नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। आज यानी 9 अप्रैल को पहली बार सेंसेक्स 75000 और निफ्टी 22700 के पार खुला। प्री-ओपनिंग में स्टेट बैंक और टेक महिंद्रा को छोड़कर सभी स्टॉक हरे निशान पर थे। सेंसेक्स पिछले बंद की तुलना में 381 अंकों की उछाल के साथ 75124 के ऐतिहासिक स्तर पर रहा। इतिहास रचने में निफ्टी भी पीछे नहीं रहा। निफ्टी आज 98 अंकों की उछाल के साथ 22765 के स्तर से आज दिन की शुरुआत की। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने आज के कारोबार की शुरुआत नए ऑल टाइम हाई से की है। बीएसई सेंसेक्स आज 75000 को पार कर गया, लेकिन 60,000 से 70,000 तक पहुंचने में 548 दिन या 1.5 साल लगे, जो 10,000 अंक को पार करने के लिए दूसरा सबसे धीमा है। सेंसेक्स 24 सितंबर, 2021 को 60,000 अंक पर पहुंच गया था। सेंसेक्स की सबसे धीमी 10,000 अंक की जर्नी 20,000 से 30,000 तक रही है, जहां भारत के सबसे पुराने एक्सचेंज को 2,318 दिन या 6.35 साल लगे। सेंसेक्स 26 अप्रैल, 2017 को 30,000 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स को 30,000 से 40,000 तक पहुंचने में 520 दिन या 1.42 वर्ष लगे। सेंसेक्स 3 जून, 2019 को इस मील के पत्थर तक पहुंचा और दिन के अंत में 40,267.62 पर बंद हुआ। आपके बता दें कि 7 फरवरी 2006 को 10,000 से 11 दिसंबर 2007 को 20,000 तक पहुंचने में सेंसेक्स को 463 दिन या 1.3 साल लगे, जबकि 40,000 से 50,000 तक पहुंचने में 416 दिन या 1.14 साल लगे। 3 फरवरी 2021 को सेंसेक्स 50,255.75 पर बंद हुआ। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation चैत्र नवरात्र घट स्थापना पर मेवल की महारानी ईडाणा माता ने किया अग्नि स्नान जैनम ज्वलेर्स हत्याकांड : तीसरा आरोपी गिरफ्तार, पुलिस की गुगली पर ये भी हो गया ‘पगबाधा’